चमकदार रोशनी
नहीं नसीब होती हर किसी को
भाग्य देता स्वतः
प्रयास मेहनत शब्द केवल पुष्टि करते
भीतरी खालीपन का भराव
मजबूती देते व्यक्तित्व को बनाते कर्मवीर
असल नहीं यह असलियत
ओर बंध जाते कर्म परिणाम से युक्त
हर कार्य अनायास ही बेबूझ भी
बन जाता फलदायक
जब अदृश्य शक्ति का रहता साथ
सामाजिक व्यवस्था देती जाती
रोशन राहें भाग्य धारी को
जन्म से हो जाता निर्धारण
जीवन की भावी शान आन बान
धन वैभव ओर श्रेष्ठता
नहीं कर्म से अर्जित किया जाना बाकी
सब कुछ प्रकृतिस्थ ईश्वरीय व्यवस्था
दुर्भाग्यवान भी जन्म से
पाता अपनी औकात
उसके कर्म से पाया भी हो जाता
उसका नहीं
समाजिक व्यवस्था का प्रतिफलन
या ईश्वरीय कृपा
कर्मठता का परिणाम नित्य संदेहास्पद ।
छगन लाल गर्ग ।