Sunday, April 3, 2016

निर्मोही।


तुम आये
मत करो ना ज्यादती
रोकता हूँ मैं तुम्हें
थोड़े रूको तो
कौन आता किसी के यहाँ
इतनी जोखिम लेकर
तुम आये मत जाओ खाली हाथ
ले जाओ तुम्हारा
असली हक मेरे जीते जी
बाप कहाता तुम्हारा
क्या फर्क पडता
मेरे रहने की जगह नहीं हो
वहीं बन सके तुम्हारा सहारा
बैच दो तुम्हारा हक यह
कहता हूँ मैं
अच्छा हुआ तुम आये सम्मान देने
कोन पूछता आजकल
सीधे ही बैच देते तो
क्या कर लेता मैं
ईश्वर करे
ओर चले तुम्हारा धंधा
बड़ी चिंता तुम्हारी
तुम्हारे बीबी बच्चे उनकी परवरिश
मंहगे स्कूलों की पढाई
ओर तुम्हारी नौकरी
कैसे चलता होगा
मेरा क्या रखो ना रखो
पड़ा रहूँगा कहीं
लाओ कागजात करता हूँ दस्तखत
आओ ना पुत्र
शायद अंतिम हो यह सब
ओर मेरे मन यह रह जाये पीड़ा
कि आखिरी वक्त मैं हो चुका
निर्मम निर्मोही
मत करो ऐसा करता हूँ वही
जो कहते तुम ।
छगन लाल गर्ग ।