प्रभाव डालता धुंधलका
नभ घीरा
हवा के धक्के होते महसूस
धूल भरे
देते चुभन तन के नाजुक अंश
होने लगते जख्मी
आँखों मे खटकती धक्केदार हवा
स्व क्षमता रोशनी होती जाती
एकमेव धुंधलके मे घुलकर
कालिमा का हल्का सा नशा चढता जाता
नभ उज्ज्वल सूर्य रश्मियों पर
ओर मदहोश उजाला घीर जाता
कालिमा की उन्माद पूर्ण नशीली बाहों मे
बहुत कम बच पाता अस्तित्व
स्वयं की अस्मिता खोई खोई
कभी कभार कालिमा की करवट लेते
अंगडाई की अल्हडता बीच
रश्मि पूंञ्ज का होता हल्का सा दीदार
बड़ा अदभूत क्षण प्रकृति रमण
उजाले ओर अंधेरे बीच
दो विपरीत अस्तित्व आशक्ति मय
करते जाते प्रेमालाप कौतुहलमय ।
छगन लाल गर्ग ।