Thursday, April 14, 2016

टूटते मूल्य ।

भाई यही तो
समझदारी
देने लगी प्रसिद्धि कि
भावनात्मक मत जीओ
मतलब से प्रेरित रहो
हर पल
कर्तव्य आदर्श सब
मृत क्रियायें
कहते रहो आवश्यकतानुसार
इन्हे मत करो अंगीकृत
अंगीकार मतलब करो
रिश्ते नाते सब प्रपंच भंवर
मतलब में फसो रहो
जागरूक
तुम्हारा हर कदम
संग्रहण निमित्त रहे
माँ बाप सब ढकोसला
भावना का
नही सहयोगी हमारे
खींचने लगते खाई की तरफ
सुनो उन्हें भी
पर अग्राह्य रहे हर सीख
वही सत्य समझो
जो वैभव परिणाम दे
समाहित हो जाते इसी में
भक्ति नीति प्रेम सौंदर्य ओर यश
बाहरी जीवन ही
भीतर का छाया बनता
यद्यपि बचता नही भीतर
अवशेष अंश आत्मा का
यदि उभरना चाहे
दमित करो दान पुण्य से
हौशियार रहो मूल्य वसूल करो
इसका भी
राजसत्ता  से अख्तियार लो
आयोजन करो भीड
खर्चा होने दो हिसाब से
रखो पत्थर मतलब पर
भारी धैर्यवान बनना जरूरी
दान के समय
इस्तहार छपवाओ चैनल चलवाओ
करो निवेश
आखिर यही बरकत बनकर
तिजोरी संवारेगा समझ रहे हो
असलियत तरक्की का
यही सूत्र भी रहस्यमय
बनना न बनना तुम्हारा अपना निर्णय ।
छगन लाल गर्ग ।