अलौकिक सत्ता
वितरण करती आंशिक
अपनी सृजन सत्ता
मानव की सर्वोच्च ऊर्जा
प्रस्फूटन लेती प्राण तत्व
ओर अदृश्य
मानव चेतना से विमुख हुई
ऊर्जा अवतरित पुँञ्ज बन
भीतर अति गहरे अंतर
ओर तब चेतन प्राण
एकाग्रता चाहता
अंतर की ऊर्जा का संकुल
अदृश्य आभा प्राण पाता
ओर लक्ष्य होता निर्धारित
प्रभुत्व सत्ता अलौकिक
अंश अदृश्य को हलचल देता
सिद्धि की परमावस्था
समर्पित होती अलौकिक संप्रति
अकथनीय
आभा का वर्तुल होकर बहता
लक्षित दिशा वस्तु
ओर तभी घटता साक्षात्कार
आराध्य आराधक बीच
मंत्रों का सूत्र
बीज शब्द बनते
ओर लक्ष्य भेद देते
भक्ति रस
आराध्य शरणो मे
बहुत सार्थक होते
मंत्रोच्चारण
सत्य यह कि मंत्र
अतुलनीय वरदान ईश्वर का
अपने निश्छल भक्त को ।
छगन लाल गर्ग ।