Tuesday, April 5, 2016

लक्ष्य ।


सेवा कार्य का
अब हुआ बदलाव
नव चेतन युग का
यह अकाट्य सच
हर व्यक्ति व्यथित वर्चस्व
बताना चाहता अपना अस्तित्व
पहचान बोझ से पीडित नित्य
वंचित हुआ जाता आंतरिक शांति
नहीं हो सका मुक्त चेतन
ओर स्वबंधु का भरोसा
नहीं देता आत्मीयता भरा विश्वास
नहीं संबधों का सिलसिला
सूचीबद्ध की टटोलना हो
काम लायक जिन्दगी मे
नया जमाना नया चाहता
बिना विचार विमर्श
ना खुद का ना विचारकों का
अज्ञात आकर्षण
लूटाना चाहता अपनी अस्मिता
अपनी संस्कृति
विभेदों से संत्रस्त विध्वंस चाहता
सिद्धांत परंपराऐ ओर
थोपे मूल्यों का
संघर्ष अनवरत अदृश्य
मौन उमस भरा
आज युवाओं का लक्ष्य
बदलाव चाहत मे
अवरोधकों का उन्मूलन कर
 बढना मात्र लक्ष्य ।
छगन लाल गर्ग ।