Saturday, April 23, 2016

लाचारी।


कहां कहां लेते रहे लाचारी
बहुत मुश्किल हैं जीवन जीना भी
परेशान करते नित्य सेवाओं मे लगे
कर्मचारी अधिकारी
नहीं सुनते बिना सिफारिश
ओर नेता नहीं पाते आश्वासन से छुटकारा
फसे फसाये कार्यकर्ता व आम को
देते रहते आश्वासन का पुख्ता सबूत
ओर  निकलता जाता समय यूँ ही
बिना कुछ पाये करे
अब देखो ना जगह जगह टूटता जर्जर
बिजली का खंभा
टूटते दुसरे खंभो के आसरे खडा
देता जाता चुनौती किसी अनहोनी की
ओर अर्ज लिखित मौखिक करते
गुजर चुका एक पंचक
सिफारिश भी भीडवाई अफसर को
अफसर से
नतीजन देखा करा बदलने का मिलता
आज तक आश्वासन
सुनते हैं अबकी बार दबंग हैं अफसर
नहीं मानता नेताओ का
व्यक्तिश निवेदन कर चुका
आश्वासन की जगह डाँट खाया
धमकी भी
आइन्दा मत आना
हम अपने काम को प्राथमिकता से
करेंगे पूरा
आपका नंबर नहीं आ सकता इस वर्ष
लाचारी हैं ईश्वरीय दीपक जलाता
मांगता हूँ भीख
बच जाय मेरा परिवार किसी अनहोनी से।
छगन लाल गर्ग ।