Sunday, April 24, 2016

मेरे तनय ।

चल दिये मेरे सहारे
ममत्व त्याग कर
मेरे शरीर के अंश नही तुम केवल
निवासी थे मेरी आत्मा के भी
नही माना नही भाया
साथ मेरा तुम्हारा
ओर देखा कैसे मंझधार छोड
चल दिये अगली यात्रा निमित्त
अनंत तुम
ओर यह देह नही रहे
जिस पर मेरे ममत्व का हक
नही रहे तुम चल दिये बहाने बना कर
रूप अस्तित्व अस्वीकार कर
पंच तत्व विलय कर
चैतन्य परम निस्पृह सूक्ष्म तुम
नही शरीर नही तुम
अब तक मात्र आभासित रहे
बन मेरे तनय शरीर
शायद यह सबक मेरे लिए
तुम्हारा
मेरे आत्मज्ञान निमित्त
कि नही मनुष्य शरीर
चैतन्य  आत्मा मात्र
ओर तुम देखते सर्वज्ञ व्यापक
असंग हो तुम
कैसे रहते शरीर संग
पिता शरीर तुम्हारा अपात्र
ओर शायद यही कारण
चल दिये तुम
पंच तत्व शरीर त्याग
अनंत यात्रा निमित्त ।
छगन लाल गर्ग ।