बीत अतीत के स्वप्न प्रभात नव झलक दे दी
नभ नव सागर उल्टा हुआ रीत रहा जल भेदी
तारों लगी चुनर झीनी मुग्धा ने मुस्कान दे दी
अरूण अंचल हटा मुख उषा नेह झलक दे दी
पखेरू मृदु हवा में उडने लगे
कपोल वायु संग डोलने लगे
नव अंकुर डाल से फूटने लगे
लतिका नवल भ्रमर उडने लगे ।
कलियाँ सौंदर्य रस परिपक्व हुई
नवल मधुर मुकूल गागर गात हुई
रस मादक बन हिलोरे उफान हुई
लावण्य तन रस समर्पित काम हुई ।
उन्माद उन्मुक्त उमंग उछाल छा गया
अधराधर नव कपोल बन भाता गया
आह अमंद अमृत आल्हाद पीता गया
आच्छादित आनंद अलकों आता गया।
आह जीवन मिलन का क्षण यह मेरा करो
वैभव अगर तुम देना चाहो जीवन यही करो
स्पर्श रूप रस आनन्दित जीवन नित ही करो
मधु लहरे नित असीम उठे सुख उपाय करो।
छगन लाल गर्ग ।
नभ नव सागर उल्टा हुआ रीत रहा जल भेदी
तारों लगी चुनर झीनी मुग्धा ने मुस्कान दे दी
अरूण अंचल हटा मुख उषा नेह झलक दे दी
पखेरू मृदु हवा में उडने लगे
कपोल वायु संग डोलने लगे
नव अंकुर डाल से फूटने लगे
लतिका नवल भ्रमर उडने लगे ।
कलियाँ सौंदर्य रस परिपक्व हुई
नवल मधुर मुकूल गागर गात हुई
रस मादक बन हिलोरे उफान हुई
लावण्य तन रस समर्पित काम हुई ।
उन्माद उन्मुक्त उमंग उछाल छा गया
अधराधर नव कपोल बन भाता गया
आह अमंद अमृत आल्हाद पीता गया
आच्छादित आनंद अलकों आता गया।
आह जीवन मिलन का क्षण यह मेरा करो
वैभव अगर तुम देना चाहो जीवन यही करो
स्पर्श रूप रस आनन्दित जीवन नित ही करो
मधु लहरे नित असीम उठे सुख उपाय करो।
छगन लाल गर्ग ।