Saturday, April 23, 2016

ऊडो ना ।

ऊडों ना थोड़े प्राण मेरे
उडता तुम्हें देख तो लूँ
तब नहीं रहेगा चेतन
ख्वाब सुखे भाव रूखे
विकल व्याकुल हुआ तब
परमेश्वर से उन्मुख होना
बात करना सीख तो लूँ
हृदय हारी चेतना से
बोध केवल शास्त्र रहता
पाप पुण्य परोपकार का
हिसाब किताब लेकर रहता
नहीं रे प्राण राग ध्वनि
आकूल श्याम श्याम कहती
नहीं रे नेह की सरिता
पावन मंथर सागर बहती
पल निमिष भर प्राण मेरे
उडने का अभ्यास देख लूँ
ऊडों ना थोड़े प्राण मेरे
उडता हुआ तुम्हें देख तो लूँ
अंधेरे घने क्या जाओगे तुम
रूप अंधला काल बनकर
अनगिनत अवरोध आखिर
पार परम पराक्रम होंगे
ओर भीतर चेतना तब
भूल भ्रम भारी कहेगी
हो सके तो प्राण मेरे
अनभिज्ञ अनहोनी अंत कह दो
चेतना मे आते नहीं तुम
केवल थोड़ा अभ्यास कह दो
ऊडो ना थोड़े प्राण मेरे
उडता हुआ तुम्हें देख तो लूँ ।
छगन लाल गर्ग।