अधिक चिंतन तो नहीं चाहता
विवशता छा जाती
गूढ जीवन
देने लगता अपने होने का अर्थ
ओर यह अनायास घेरता भाव
शांत जीवन में हलचल भर देता
लगता हृदय सागर मे
विचारों के अनगिनत फैके जाते
कंकर कि उछल जाती लहरें
तरंग बनी भावों की
चारों ओर के वृतुल घेरने लगते
शांत निश्छल विचारों को
ओर उथल पुथल मच जाती
फस जाता विचारों के भंवर
बड़ा मुश्किल होता बचना चेतन का
ओर मंथन की गति ओर होती तेज
नहीं पाता संतुलन
अस्तित्व ओर विचारों बीच
एक सूत्र देता जाता विश्वास
दृढ़ता भरा
विपरीत चिंतन हैं संतुलन
बहुत गहरे यही सूत्र जीवन का
असंतुलन की विपरीतता जीवंत रखती
स्थिर रहो भीतर
होने दो इर्द गिर्द विचारों का भंवर
ठीक बवंडर की तरह
रिक्त रह जाती धूरी जहां से शक्ति मिलती
घूमने की तीव्रता से उत्पात की
असल मे स्थित रहता चाक
जिस पर गति लेता वाहन का पहिया
सत्य यही
असंतुलन मिटता केवल विपरीत दशा में।
छगन लाल गर्ग ।