अच्छा कहते तुम
बार बार वहीं भाव
बदल जाते मात्र शब्द
पर
शब्दों की हेरा फेरी नहीं
बदल पाती तथ्य
वहीं प्रकटता चाहे
कहो ऊँचे जटिल शब्दों
या काम चलाऊ
हाँ यह जरूर समझ का
भाव धारा मे अडचन आती
जब तुम चाहते हो कहना
सर्व मान्य
परिभाषित अकाट्य तर्को से
स्लीप चिपकाई पृष्ठ वार
ग्रंथ प्रमाणित प्रेम की व्याख्या
हताश हो जाता हूँ मैं
प्रेम समझना नहीं होता
ओर न ही समझाना
कि तुम देते रहते हो आकार
ऊँचाई स्थित चाँद तारों से
यह ठीक कि भाती हैं ऊँचाई
पर यह अपना सच कहां
हाँ अभिव्यक्त करो
शायद प्रेम ऊँचाई पाये
अगर उसमें भी
तुम्हारी भीतरी भाव दशा
ऊँचाई पाये तभी
स्थूल नहीं हैं प्रेम
मत करो गलती अहसास मे
स्थूल कभी ऊँचा नहीं हो सकता
पर अगर जुडता
उसमे भावों का दरिया
उठने लगती हिलोरे
अनंत करती जाती स्पर्श
साक्षात हो उठता अनंत
इसी शुद्र जीवन मे
ओर प्यार बन जाता प्रार्थनामय
विद्ववता ओर सत्य दो विपरीत ध्रुव
सत्य समझने मे नहीं आवश्यकता
विश्वविद्यालय की डाक्टरेक्ट डिग्री ।
छगन लाल गर्ग ।