मेरे अस्तित्व तुम्हें नही कर पाता
विस्मृत प्राण संग
आओ ना तुम प्रतिक्षा रत व्यथित
कब रहा अस्वीकार
आना तुम्हारा दृश्य भी तुम अदृश्य भी तुम
समाना तुम्हारा विराट संग
कर जाता विमुख मुझे देहिक मोह
आओ ना मेरे शात्विक बिम्ब
खुलना चाहते चेतन द्वार तुम्हारे लिए
देखता जाता स्मृति पथ आकार पाते
परिचित सा अपनत्व खोया विलय होता मुझमे
अलौकिक तुम्हारा चेतन अंश
तुम गहन विरल अचेतन पर प्राणमय
कहता गाता प्राणा राग तुम आते हो
असीम मेरे तेरे स्वागत निमित्त
खुल खुल जा रहे स्वतः द्वार
कहां विलयन हुआ अनमेल भाव
गाऊँ उन्माद भर मिलन राग
तेरे मेरे का अभिनय अब असंभव काज
आओ प्रिय मेरे अंतरतम स्पंदन चेतन अंश ।
छगन लाल गर्ग ।
विस्मृत प्राण संग
आओ ना तुम प्रतिक्षा रत व्यथित
कब रहा अस्वीकार
आना तुम्हारा दृश्य भी तुम अदृश्य भी तुम
समाना तुम्हारा विराट संग
कर जाता विमुख मुझे देहिक मोह
आओ ना मेरे शात्विक बिम्ब
खुलना चाहते चेतन द्वार तुम्हारे लिए
देखता जाता स्मृति पथ आकार पाते
परिचित सा अपनत्व खोया विलय होता मुझमे
अलौकिक तुम्हारा चेतन अंश
तुम गहन विरल अचेतन पर प्राणमय
कहता गाता प्राणा राग तुम आते हो
असीम मेरे तेरे स्वागत निमित्त
खुल खुल जा रहे स्वतः द्वार
कहां विलयन हुआ अनमेल भाव
गाऊँ उन्माद भर मिलन राग
तेरे मेरे का अभिनय अब असंभव काज
आओ प्रिय मेरे अंतरतम स्पंदन चेतन अंश ।
छगन लाल गर्ग ।