Tuesday, April 19, 2016

अर्थ युग ।

अर्थ शास्त्री युग यह
हर क्षण महत्वपूर्ण केवल
अर्थाजन निमित्त
ओर अन्य सहयोगी कार्य
केवल बनावट जीवन की
नही  उपादेयता कोई
खरीददारी हो सकती तमाम सुख
भौतिक तृष्णाओ का उपचार संभव
केवल धन सामर्थ्य पर
बिकता हर भाव हर विचार
ओर जीवन के अतिरेक क्षण भी
जिन्हे जीना होता भावमय
वह भी चकाचौंध भरी ऐश्वर्य चमक मे
खोते जा रहे हम निरंतर
पशुतुल्य शक्ति मद अहंकार के धनी
बनने में श्रेष्ठता साबित हमारी
संवेदनशीलता हीन पशुता का जीना
आज का सत्य
दृश्यमान मानव दिखते हम
पर नही रहे मानवीय ।
छगन लाल गर्ग ।