जानता हूँ यह
पूर्णता नहीं
जमीन व्याप्त सौन्दर्य
केवल अंश ओर वह भी
उधार पाया
ससीम भी लघु भी
अलौकिक सौन्दर्य सागर
परमात्मा से
आत्मा कहां पाती तुष्टता
स्नेह सागर सी
केवल तन तुष्टि तृष्णामय मोह
देखता जमीन का सौन्दर्य
सत्य ओर होगा
आता रहता अहसासों में
बिजली वेग से
झलक निरखते ही
अनुपम सा
हृदय में जगमगाहट देता
खो जाता अचेतन
ओर अतृप्त नयनों का नूर
तलाशता रहता
जमीन पर बिखरे
मनमोहक सौन्दर्य बीच
अनुभूति का सौन्दर्य
कहते तुम
अजीब अभिव्यक्ति देते
धरातलीय सौन्दर्य पहुँचा देते
आसमान तक
चाँद तारों तक
कहो तुम तुम्हारी विवशता
नारी कुसुम का महकता तन
गुलाब या कमल
ओर भी देते रहो
केवल उपमा अद्वितीय
इससे होगा क्या
मन बहलेगा तुम्हारा
या कि जिसे सुनाते तुम
यह सब अचेतन अनुभूति की
छाया मात्र
असलियत कहां
फिर होना पडता सारोबार
समय की करवटो के साथ
आत्म ग्लानि से द्रवित
ओर तब
समय पंछी की यात्रा का
आखिरी पड़ाव
मांगता हिसाब
जीवन जीने का
सौन्दर्य हीन भ्रमित अतीत
नहीं रख सका कुछ संचित
देने योग्य
मंजिल की सीढ़ीयां पर
थिरकते कदम
पश्चाताप का जप करते
बढ़ते पर पाएँगे क्या
संचय सौन्दर्य जीवन सार
अलौकिक सौन्दर्य की झलक
केवल आभासित देती गति
वहां जहां बिखरा घना
शांत गंभीर शीतल ओर
आत्मलीन स्नेहिल सौन्दर्य
बुलाता अनंत की ओर ।
छगन लाल गर्ग ।
पूर्णता नहीं
जमीन व्याप्त सौन्दर्य
केवल अंश ओर वह भी
उधार पाया
ससीम भी लघु भी
अलौकिक सौन्दर्य सागर
परमात्मा से
आत्मा कहां पाती तुष्टता
स्नेह सागर सी
केवल तन तुष्टि तृष्णामय मोह
देखता जमीन का सौन्दर्य
सत्य ओर होगा
आता रहता अहसासों में
बिजली वेग से
झलक निरखते ही
अनुपम सा
हृदय में जगमगाहट देता
खो जाता अचेतन
ओर अतृप्त नयनों का नूर
तलाशता रहता
जमीन पर बिखरे
मनमोहक सौन्दर्य बीच
अनुभूति का सौन्दर्य
कहते तुम
अजीब अभिव्यक्ति देते
धरातलीय सौन्दर्य पहुँचा देते
आसमान तक
चाँद तारों तक
कहो तुम तुम्हारी विवशता
नारी कुसुम का महकता तन
गुलाब या कमल
ओर भी देते रहो
केवल उपमा अद्वितीय
इससे होगा क्या
मन बहलेगा तुम्हारा
या कि जिसे सुनाते तुम
यह सब अचेतन अनुभूति की
छाया मात्र
असलियत कहां
फिर होना पडता सारोबार
समय की करवटो के साथ
आत्म ग्लानि से द्रवित
ओर तब
समय पंछी की यात्रा का
आखिरी पड़ाव
मांगता हिसाब
जीवन जीने का
सौन्दर्य हीन भ्रमित अतीत
नहीं रख सका कुछ संचित
देने योग्य
मंजिल की सीढ़ीयां पर
थिरकते कदम
पश्चाताप का जप करते
बढ़ते पर पाएँगे क्या
संचय सौन्दर्य जीवन सार
अलौकिक सौन्दर्य की झलक
केवल आभासित देती गति
वहां जहां बिखरा घना
शांत गंभीर शीतल ओर
आत्मलीन स्नेहिल सौन्दर्य
बुलाता अनंत की ओर ।
छगन लाल गर्ग ।