Tuesday, April 26, 2016

जीवन राग।

यही जीवन राग मेरा
संलग्न रहने लेता हूँ श्वासें
इस तरह मत देखो
घायल चित जी नही सकूंगा
मोहिनी हो तुम
मेरे श्वास राग तुमसे लेते तरंग
आबद्ध रहना अच्छा लगता
तुम्हें करीब से जानना चाहता
आशक्ति फिर होती प्रबल
इन्कार तुम्हारा अंगडाई बढाता
अवरोध फासले अब नही मान्य
गया वह सब दुस्वप्न
होने दो अब
शामिल ख्याल हमारे तुम्हारे
अडचन बनते हर विचार
तिरोहित कर चाहता विलय
भाव अछूयें आज बहने दो
बहुत रह गया बाकी जीना
अब तक कहां रहा स्नेहिल बंधन
कि आबद्ध नही रहा
कभी भावनाओं के झुलों मे
नही केवल स्वप्नमय रहा जीवन
आधार कहां रहा स्पर्श का
बहुत ख्वाहिश हो चुकी संग्रहित
जज्बात जिज्ञासु हुए हो रहे
ज्वलनशील ऊर्जा ठंडक चाहती
मत रोको अब
नही अब रोकना पाप ना हो जाए
फिर जीवन नही ख्वाहिश अधूरी
ओर कोहरा घुला जीवन
मृत्यु से बदतर
आशान्वित रहना चाहता
रहने दो ना
आओ जी ले एक दुनिया प्यार भरी
फिर नही भरोसा कल हो ना हो ।
छगन लाल गर्ग ।