आओ तनिक बेठो
बडे व्यस्त जिन्दगी के मालिक
शुक्रगुजार जिन्दगी
तुम्हारी कि तुम मिले
ओर अहोभाग्य पाया
अब नही हर किसी के वश में
पकड जिन्दगी की
कि स्वच्छंदता हो
उसे अपने रूप गढे
अधोगति प्रबल हुई जाती
खिंचाव खूब गुरूत्वाकर्षण सा
व्यक्ति की ऊंचाईयां नही रही
सामर्थ्याधीन
अच्छा लगा तुम व्यस्त रहे
तुम स्वार्थ रस के शौकीन
बेपरवाह हृदय संवेदनहीन महत्वाकांक्षी
गणितज्ञ तुम समय जीते
यही कारण
बहुत उठे हुए ऊँचे लगते
दृष्टि भ्रमित रह जाता मैं
कि तुम हो मानव भी
अधरातलीय
ज्योतिपुञ्ज अलौकिक तुम
आओ वक्त समझ ले
ठीक होगा
अस्वाभाविक ऊँचाईयों से
खतरा घना
मनुष्यता सीढी बनती
सूक्ष्म यात्रा की
ओर तुम्हारा यह फासला अलगाव
बढने लगा आत्मज्ञान से
तुम्हारा यह खिंचाव भौतिकता
देगा अधोगति
सुनने की क्षमता कहां तुम्हारी
समस्त इन्द्रियां भीगी घनी स्थूल रस
छोडो ना
नही हुई आज तक किसी की
ठगी करती चेतना संग
आओ तनिक बेठो
कही आंशिक ही शुष्कता भीतरी भीगे
ओर कुंठित रस स्त्रोत फूटे ।
छगन लाल गर्ग ।
बडे व्यस्त जिन्दगी के मालिक
शुक्रगुजार जिन्दगी
तुम्हारी कि तुम मिले
ओर अहोभाग्य पाया
अब नही हर किसी के वश में
पकड जिन्दगी की
कि स्वच्छंदता हो
उसे अपने रूप गढे
अधोगति प्रबल हुई जाती
खिंचाव खूब गुरूत्वाकर्षण सा
व्यक्ति की ऊंचाईयां नही रही
सामर्थ्याधीन
अच्छा लगा तुम व्यस्त रहे
तुम स्वार्थ रस के शौकीन
बेपरवाह हृदय संवेदनहीन महत्वाकांक्षी
गणितज्ञ तुम समय जीते
यही कारण
बहुत उठे हुए ऊँचे लगते
दृष्टि भ्रमित रह जाता मैं
कि तुम हो मानव भी
अधरातलीय
ज्योतिपुञ्ज अलौकिक तुम
आओ वक्त समझ ले
ठीक होगा
अस्वाभाविक ऊँचाईयों से
खतरा घना
मनुष्यता सीढी बनती
सूक्ष्म यात्रा की
ओर तुम्हारा यह फासला अलगाव
बढने लगा आत्मज्ञान से
तुम्हारा यह खिंचाव भौतिकता
देगा अधोगति
सुनने की क्षमता कहां तुम्हारी
समस्त इन्द्रियां भीगी घनी स्थूल रस
छोडो ना
नही हुई आज तक किसी की
ठगी करती चेतना संग
आओ तनिक बेठो
कही आंशिक ही शुष्कता भीतरी भीगे
ओर कुंठित रस स्त्रोत फूटे ।
छगन लाल गर्ग ।