आज अजीब देखा दृश्य
बिल्कुल उल्टा पुल्टा
कभी नहीं स्वीकारा
सेवारत अधिकारी रहते
कि आयेगा कभी
धृष्टता का विभत्स रूप
वहीं तो हैं
रात रात भर बिना बुलाये
तैयार रहते
साहब की सेवा मे
ओर जलन करते दूसरे
जिनको नहीं मिलता मौका
सेवा का
आज वे ही अधीनस्थ देखो
रंगमंच के स्टेज पर
शानदार सुशोभित कुर्सी पर बिराजे
देते है सीख उतरार्द्ध की
पद हीन पर बहुमत के धनी
प्रजातंत्रिय व्यवस्था के सबूत
ओर हम
रिटायर अधिकारी केवल रहे
श्रौता
बेआवाज सबूत हीन
वर्चस्व के
चलो यह अनुभव भी संतुलन देगा
अवशेष जीवन को ।
छगन लाल गर्ग ।