Wednesday, April 27, 2016

सद्भावना ।

नहीं ले सकता मैं
निजी मानवीय सद्भावना से
अपना सम्मान
आवश्यक होते मेरे ऊँचाई निमित्त
नीतिगत कमाई के अलावा
अपने परिश्रम से शैतानी कर
कमाई दौलत पर बने
ऊँचे उठे मकान
असल मे इन्हीं की बदौलत
मेरी बढ़ती ख्याली ऊँचाई
बहुमंजिली इमारत की वजह
अधिकांश जानते मुझे
ओर युग का सत्य भी
नेक नियत नहीं कारण इज्जत का
कि बढ़ा सके व्यक्ति का कद
हम ऊँचे पद से हैं रिटायर
अतीत देता रहा ऊँचाईयां हमें
पद की बदोलत
पर अब पद तो रहा नहीं
ऊंचा खिताब मिले कैसे
आलिशान आवासीय
बंगला वजह
यही दिलाता याद अतीत ऊँचाईयां
ओर वर्तमान का वजूद बनाये रखता
मात्र यह बंगला
दोनों ही अवस्थाओ का सच
खुला खुला साफ साफ दिखता
केवल अतीत वर्तमान
सत्य केवल एक
पहले पद जीते रहे
अब बाकी जीना रहा बंगला
नहीं मिला समय
खुद को समझकर जीना
कहीं नहीं अपना पन
जिस पर करना पड़े फख्र
व्यक्तित्व नहीं झलकता
विगत का पद ओर
वर्तमान का विशाल भवन
मात्र इसी कारण मेहरबानी
कि चर्चित रहते मित्रों मे
ओर इधर
निरंतर प्रगति मे
रात दिन अग्रसर काबिल संताने
राजनीति मे पहुँच काबलियत
ओर दिमागी कौऐ मे
अच्छी सांठगांठ आजकल
घनी प्रतिभा उजागर करते जाते
ओर आकार बढता वर्चस्व
बंगले शोषण करते नित्य
व्यक्ति की प्रतिभा ओर
इन्सानियत के संवेदनशील हृदय को
फासला बढ़ता जाता
आम ओर खास बीच
सत्य यही प्रत्यक्ष होता जीवन ।
छगन लाल गर्ग ।