सुगंध भरा जहां
आह अलौकिक रसभरी
झलक उसकी शायद
उतरी जमीं पर
आकाशीय मार्ग खुला खुला
आह अनंत
मुस्कान संकेत नभ करता बुलाता
अपनी ओर
उन्नत अनंत की उड़ान निमित्त
जुटाना चाहता भीतरी ऊर्जा
विचारों के पंख हैं मेरे पास
बुलाओ ना मुझे बार बार
आना चाहता आवाज की रज्जु चढ़ा
बुलाओ आकाश से
दो भाव भरा निमंत्रण अपना अंश जान
उतने ही पंख दिये तूने
कि ले सकूँ उड़ान तुझ तक
भरोसा तो दो कि सक्षम बनूँ
हिम्मत हो
ओर एक बार का भरोसा ही
बन सके अनंत का सार ।
छगन लाल गर्ग ।