अंततः नमन तुझे
मेरे मर्यादा पुरुषोत्तम राम
स्वीकार मुझे
मानवीय स्थूल देह तुम्हारी
कृत्य नही रहे मानवीय
पर असीम क्षमता मानव चित
देती रश्मि जो चीरती तम
अहसास ईश्वरीय तुम्हारा
नही त्यागना चाहता मेरे राम
अमानवीय दिव्यता कहां रखा पाती
हमारे समान
नही कह सकता तुम्हें मानव
तुम भगवान मेरे
संस्कृति संरक्षण निमित्त
मूल्य प्रतिष्ठित समाज
नूतन चाह पुकार उठी आज
विश्रृंखलित मानव मूल्य
धरा जीवन असंतुलित आज
विवेक बना अहं मात्र
शुष्कता व्याप्त मन चाहता वैभव गर्त
मानव मंथन सार बोध भ्रमित
नही कोई रसायन जो राम बने
आनंद निर्झर पृथ्वी पर केवल
राम नाम तुम्हारा
केवल यही रस बहता
सत्य भी यही रस भी यही
यह अमृत रस पान करे हर कोई
मेरे राम तेरे नाम की
निर्झर बन बहती शराब
बहती करती मदमस्त
राम नाम की सरिता
पावन स्त्रोत सरिता का
रमण कर लो तन मन संग
रमने दो चित राममय सरिता
चित रम गया मेरे राम वही
मेरे उद्धारक वही
नाम राम
प्रतीक बना परमात्मा
प्रेम रस दरिया हुआ
आज राममय
राम नवमी तो एक स्तंभ बना
मेरे राम भगवान का ।
छगन लाल गर्ग ।
मेरे मर्यादा पुरुषोत्तम राम
स्वीकार मुझे
मानवीय स्थूल देह तुम्हारी
कृत्य नही रहे मानवीय
पर असीम क्षमता मानव चित
देती रश्मि जो चीरती तम
अहसास ईश्वरीय तुम्हारा
नही त्यागना चाहता मेरे राम
अमानवीय दिव्यता कहां रखा पाती
हमारे समान
नही कह सकता तुम्हें मानव
तुम भगवान मेरे
संस्कृति संरक्षण निमित्त
मूल्य प्रतिष्ठित समाज
नूतन चाह पुकार उठी आज
विश्रृंखलित मानव मूल्य
धरा जीवन असंतुलित आज
विवेक बना अहं मात्र
शुष्कता व्याप्त मन चाहता वैभव गर्त
मानव मंथन सार बोध भ्रमित
नही कोई रसायन जो राम बने
आनंद निर्झर पृथ्वी पर केवल
राम नाम तुम्हारा
केवल यही रस बहता
सत्य भी यही रस भी यही
यह अमृत रस पान करे हर कोई
मेरे राम तेरे नाम की
निर्झर बन बहती शराब
बहती करती मदमस्त
राम नाम की सरिता
पावन स्त्रोत सरिता का
रमण कर लो तन मन संग
रमने दो चित राममय सरिता
चित रम गया मेरे राम वही
मेरे उद्धारक वही
नाम राम
प्रतीक बना परमात्मा
प्रेम रस दरिया हुआ
आज राममय
राम नवमी तो एक स्तंभ बना
मेरे राम भगवान का ।
छगन लाल गर्ग ।