Tuesday, April 12, 2016

ठंडा हुआ अतीत।


ठंडा पड़ा अतीत
नहीं उसमे बहता
उष्णता का कोई कतरा
ओर मैं
मुडने लगता हूँ बार बार
अतीत की ओर
जो गहरी
डरावनी खामोशी ओढे
सोता रहा
ओर मैं
उष्णता की ऊर्जा लिए
पहुँच जाना चाहता
अतीत
जहाँ निस्सार अंधेरे का छाया
घेरता मुझे
बनना चाहता निष्प्राण
अचेतन जड़
करना होगा स्थगित
अतीत
वर्तमान नहीं मर जाये
अतीत मरे
ओर जीये वर्तमान
तब रह सकूँगा चेतन
उष्णतामय ऊर्जा मय
हर क्षण भूल जाना अच्छा
अतीत जीया
नव चेतन
प्रत्येक पल आता
अतीत को रोंदकर
ओर तभी पाता स्वयं मे
ताजगी की नवल मृदुलता
अभ्यास से नहीं
दृढ़ विचारों की रोशनी मे
जीना होगा वर्तमान ।
छगन लाल गर्ग ।