माँ भारती नित्य नमन तुझे
शरण रज तेरी बना माँ मुझे
तृष्णा अग्नि संतोष दे बुझे
असहाय हित बल दे मुझे ।
दे सामर्थ्य कर सकूँ गुणगान तेरा
ले अवगुण बन सकूँ लायक तेरा
दे शब्द करू ममत्व बखान तेरा
वीणा संगीत दे गाऊ गीत तेरा।
मातृ भूमि जगत करे नमन तेरा
अविरल ममत्व का बहे नीर तेरा
हर अनुभूति चित रहता वास तेरा
प्राणराग बन स्वर बने संगीत तेरा।
माँ तेरा अनुपम अंचल
छाया प्रतिपल दे चंचल
प्रेम बूँदे बरसती प्रतिपल
जीवन स्पंदन लेता हरपल।
अलौकिक गाथा तेरी माँ गाता
जग जननी अनुपम तुझसे नाता
जीवन की धड़कन तुमसे हूँ पाता
करती परिपालन दुनिया का माता।
तुम करूणा मूर्ति हो जग मे
मनोकामना फलित जीवन मे
हर प्राणी पाता तेरी ममता मे
नही तेरे शिवाय हमारा जग मे।
जंजीरो झकडी साम्राज्य लोभी
कहां निन्द आयी तेरे पुत्रों को भी
शिश अर्पित उऋण नहीं फिर भी
बलिदान हुए मन ना भरा अब भी।
धरातल तेरा अलौकिक जीवनदायी
नदियाँ अति पावन मानवता नहायी
उपजाऊ तेरा ऑगन फसलें लहलायी
तृप्त हुई तेरी संतान जीवन सुख लायी।
पर्वत तेरे अतुल संपदाधारी
पुत्रों के सब मनोरथ पूर्णकारी
बहती नदियों के प्रस्फुटनकारी
भरती नव संपदा से हूँ बलिहारी।
सागर मणि माणिक्य रत्नों भरे हैं
नहीं रीतते नित जीवंत बन रहे हैं
प्रेरित करते मानव चेतन हो रहे हैं
भारती माँ नित समृद्ध करते रहे हैं ।
वीर जीवट सलोने तेरे माता
हर पल रखते सीमा से नाता
जगते हरपल तेरी रक्षा मे माता
समर्पित हैं नहीं जीवन से नाता।
ऋषि महर्षि ब्रह्म निष्ठ तेरे
अलौकिक ब्रह्म से नित घेरे
देते हैं जीवन मर्म के सवेरे
रश्मि पुण्ज माता तेरा बिखेरे।
आजादी हित मिटे वीर बलिदानी
माता तेरी कोख लिए हैं अभिमानी
सौभाग्य घना पा पूत तेरे हुए शानी
मुक्ति तुझे दे गये जज्बा हमें कुर्बानी ।
एक सपूत तेरी कोख से आया
अंबेडकर बना गणतंत्र का छाया
जग शिरोमणि बन सब को भाया
भारती का मान समता पाठ पढाया।
गणतंत्र दिवस पर सत सत नमन मेरा
निर्बलो का बल बना संविधान अब तेरा
हर ऑगन अवसर मिलता जीवन सवेरा
समता का अनुपम जीवन अब चाहे डेरा।।
छगन लाल गर्ग।
शरण रज तेरी बना माँ मुझे
तृष्णा अग्नि संतोष दे बुझे
असहाय हित बल दे मुझे ।
दे सामर्थ्य कर सकूँ गुणगान तेरा
ले अवगुण बन सकूँ लायक तेरा
दे शब्द करू ममत्व बखान तेरा
वीणा संगीत दे गाऊ गीत तेरा।
मातृ भूमि जगत करे नमन तेरा
अविरल ममत्व का बहे नीर तेरा
हर अनुभूति चित रहता वास तेरा
प्राणराग बन स्वर बने संगीत तेरा।
माँ तेरा अनुपम अंचल
छाया प्रतिपल दे चंचल
प्रेम बूँदे बरसती प्रतिपल
जीवन स्पंदन लेता हरपल।
अलौकिक गाथा तेरी माँ गाता
जग जननी अनुपम तुझसे नाता
जीवन की धड़कन तुमसे हूँ पाता
करती परिपालन दुनिया का माता।
तुम करूणा मूर्ति हो जग मे
मनोकामना फलित जीवन मे
हर प्राणी पाता तेरी ममता मे
नही तेरे शिवाय हमारा जग मे।
जंजीरो झकडी साम्राज्य लोभी
कहां निन्द आयी तेरे पुत्रों को भी
शिश अर्पित उऋण नहीं फिर भी
बलिदान हुए मन ना भरा अब भी।
धरातल तेरा अलौकिक जीवनदायी
नदियाँ अति पावन मानवता नहायी
उपजाऊ तेरा ऑगन फसलें लहलायी
तृप्त हुई तेरी संतान जीवन सुख लायी।
पर्वत तेरे अतुल संपदाधारी
पुत्रों के सब मनोरथ पूर्णकारी
बहती नदियों के प्रस्फुटनकारी
भरती नव संपदा से हूँ बलिहारी।
सागर मणि माणिक्य रत्नों भरे हैं
नहीं रीतते नित जीवंत बन रहे हैं
प्रेरित करते मानव चेतन हो रहे हैं
भारती माँ नित समृद्ध करते रहे हैं ।
वीर जीवट सलोने तेरे माता
हर पल रखते सीमा से नाता
जगते हरपल तेरी रक्षा मे माता
समर्पित हैं नहीं जीवन से नाता।
ऋषि महर्षि ब्रह्म निष्ठ तेरे
अलौकिक ब्रह्म से नित घेरे
देते हैं जीवन मर्म के सवेरे
रश्मि पुण्ज माता तेरा बिखेरे।
आजादी हित मिटे वीर बलिदानी
माता तेरी कोख लिए हैं अभिमानी
सौभाग्य घना पा पूत तेरे हुए शानी
मुक्ति तुझे दे गये जज्बा हमें कुर्बानी ।
एक सपूत तेरी कोख से आया
अंबेडकर बना गणतंत्र का छाया
जग शिरोमणि बन सब को भाया
भारती का मान समता पाठ पढाया।
गणतंत्र दिवस पर सत सत नमन मेरा
निर्बलो का बल बना संविधान अब तेरा
हर ऑगन अवसर मिलता जीवन सवेरा
समता का अनुपम जीवन अब चाहे डेरा।।
छगन लाल गर्ग।