आह जिन्दगी
सौभाग्य मेरा मानव जीवन मेरा
अतुल सामर्थ्य
अंतरतम बोध अभिव्यक्ति क्षमताभरा
सुंदर सौष्ठव तन का स्वामी
मंगलमय अभिलाषा गूँथती जिन्दगी
बडी खूब सूरत हो तुम
सुंदर सुरभित रसभरी माया मोहिनी
आनंद पारावार
हर्षोल्लास की उतुंग तरंगे
लहराती आलोकित होता जीवन
आह जिन्दगी
राग रमण रसायन अवगाहन
अस्तित्व विरल बन प्रवाहित होता
ससीम मे सुगंध बन असीम अज्ञात
समाहित रस रसायन तेरा
प्रज्वलित उदगम आलोकमय रश्मि
आकार परमाणु पराग शरीर
तंतु अति सूक्ष्म छाया बनकर
वैभव नव संचार वीर्य अपार शिराऐं
तनाव तनी तरंगित ताल तुषार
आह जिन्दगी
संसार चक्र चलता हमसे
गतिमय हुआ उबड खाबड भरता कुचाल
तन मन हृदय रीसते घाव ही घाव
संगीत स्वर डूबता करूण राग आगार
सुगंध पलट बन चुकी दुर्गंध
ज्ञानी जन चाहे मुक्ति संसार चक्र
भीतर वासनामय राग अपार
प्रकटता कही अज्ञात राह बन नयी शक्ल
आह जिन्दगी
यह परिवर्तित संसार बदले रूप हजार
तुम नही होते एक रस एकीभूत संसार
रहना चाहो नित ताम झाम
कैसे संभव संसार हैं यह
दृष्टि भराव स्थिर सत्य झलक
वृक्ष रहे ना वृक्ष पक्षी रहे ना पक्षी
आकाश सूरज चाँद तारे
सब तुमसे तुम उनसे नही कही अंतराल
नही दृष्टि भेद तुम वही
वही तुम नही विलग संसार
सुंदर कुरूप भेद नही संचय
आह जिन्दगी ।
छगन लाल गर्ग ।
सौभाग्य मेरा मानव जीवन मेरा
अतुल सामर्थ्य
अंतरतम बोध अभिव्यक्ति क्षमताभरा
सुंदर सौष्ठव तन का स्वामी
मंगलमय अभिलाषा गूँथती जिन्दगी
बडी खूब सूरत हो तुम
सुंदर सुरभित रसभरी माया मोहिनी
आनंद पारावार
हर्षोल्लास की उतुंग तरंगे
लहराती आलोकित होता जीवन
आह जिन्दगी
राग रमण रसायन अवगाहन
अस्तित्व विरल बन प्रवाहित होता
ससीम मे सुगंध बन असीम अज्ञात
समाहित रस रसायन तेरा
प्रज्वलित उदगम आलोकमय रश्मि
आकार परमाणु पराग शरीर
तंतु अति सूक्ष्म छाया बनकर
वैभव नव संचार वीर्य अपार शिराऐं
तनाव तनी तरंगित ताल तुषार
आह जिन्दगी
संसार चक्र चलता हमसे
गतिमय हुआ उबड खाबड भरता कुचाल
तन मन हृदय रीसते घाव ही घाव
संगीत स्वर डूबता करूण राग आगार
सुगंध पलट बन चुकी दुर्गंध
ज्ञानी जन चाहे मुक्ति संसार चक्र
भीतर वासनामय राग अपार
प्रकटता कही अज्ञात राह बन नयी शक्ल
आह जिन्दगी
यह परिवर्तित संसार बदले रूप हजार
तुम नही होते एक रस एकीभूत संसार
रहना चाहो नित ताम झाम
कैसे संभव संसार हैं यह
दृष्टि भराव स्थिर सत्य झलक
वृक्ष रहे ना वृक्ष पक्षी रहे ना पक्षी
आकाश सूरज चाँद तारे
सब तुमसे तुम उनसे नही कही अंतराल
नही दृष्टि भेद तुम वही
वही तुम नही विलग संसार
सुंदर कुरूप भेद नही संचय
आह जिन्दगी ।
छगन लाल गर्ग ।