कब तक रहोगे निर्लिप्त
कोन कहता
समस्या नही तुम
हर सदस्य परिवार का
कहां मानता तुम्हें आत्मीय
चल नही पाता जीने के लिये
जरूरी होता
लोक लाज का भी प्रश्न
यही कारण कि तुम हो आंशिक
किसी कोने मे सिमटे रहने निमित
यह ठीक की सब तुम्हारा किया कराया
पर इससे क्या
यह तो फर्ज था तुम्हारा
अपनो के लिए
केवल निभाया नही कोई विशिष्टता तुम्हारी
हर कोई बाप करता
अपनी औलाद के लिए वही किया तुमने
अब बुढियाने बाद भी
करते रहते राग द्वेष
करते कोशिश अपनेपन की
राम नाम लेने की जगह
हमे मत दो सलाह मशविरा
रखो अपनेपन पास
बदौलत इसी हम रह गये पिछडे
अब बंद करो बकवास
जीने दो अपनी तरह कि कही टिक सके
अपनी अस्मिता के साथ
पुरानपंथी का गाना बंद करो
ओर जीने दो हमे
कब बन सकोगे वासना से मुक्त निर्लिप्त ।
छगन लाल गर्ग ।
कोन कहता
समस्या नही तुम
हर सदस्य परिवार का
कहां मानता तुम्हें आत्मीय
चल नही पाता जीने के लिये
जरूरी होता
लोक लाज का भी प्रश्न
यही कारण कि तुम हो आंशिक
किसी कोने मे सिमटे रहने निमित
यह ठीक की सब तुम्हारा किया कराया
पर इससे क्या
यह तो फर्ज था तुम्हारा
अपनो के लिए
केवल निभाया नही कोई विशिष्टता तुम्हारी
हर कोई बाप करता
अपनी औलाद के लिए वही किया तुमने
अब बुढियाने बाद भी
करते रहते राग द्वेष
करते कोशिश अपनेपन की
राम नाम लेने की जगह
हमे मत दो सलाह मशविरा
रखो अपनेपन पास
बदौलत इसी हम रह गये पिछडे
अब बंद करो बकवास
जीने दो अपनी तरह कि कही टिक सके
अपनी अस्मिता के साथ
पुरानपंथी का गाना बंद करो
ओर जीने दो हमे
कब बन सकोगे वासना से मुक्त निर्लिप्त ।
छगन लाल गर्ग ।