Friday, June 17, 2016

जज्बाती जीत

खेलना जानते तुम
दांवपेंच
मंजे हुए खिलाडी हो
भाई वाह बडे हुनरमंद
हर बार के विजेता
नही कह सकता
तुम्हें कोई जज्बाती
यह अलग बात कि
तुम कहते हो
अपने बारे मे यह शब्द
बहुत पुराना
यह शब्द सभ्यता विरोधी
बीते जमाने के साथ यह
तोड चुका दम
शब्द
पर तुम्हारी कामयाबी के बाद
हर बार तुम करते याद
बताते खुद को जज्बाती
चलो अच्छा रहेगा
आवरण देगा यह शब्द
तुम्हारी करतूतों को
तुम्हारी सफलता की
अथक कोशिश को
फायदा करेगा
राह देगा हर अथक कोशिश को
जो तुम्हारी तरह के है खिलाडी
उनमें संजीवनी भरेगा
जैसे भरता है तुम्हारे भीतर
हम विवश हैं
हम नही जानते खेलना
उखड जाती है श्वासें
हर बार हमारी
ओर
हारते बाजी जीवन की
हर बार
अनाडी ठहरे
क्या हो
हम थोडे अलग से
हल्के ढंग के जज्बाती ठहरे
पर इससे क्या
हमारी यह हार हमे तोडती नही
तुम्हारी जीत सी भीतर
हम हर हार से
बनते जाते पुख्ता
ओर अजीब
जीवंतता से लेते है श्वासें
जो नही नसीब
तरकीब की जज्बाती जीत के हिस्से
छगन लाल गर्ग