Wednesday, June 15, 2016

तडप हैं अज्ञात

तडप हैं अज्ञात अति तीव्र चुभन
अकारण रिक्तता हुई जाती व्याप्त तन भीतर
असंख्य घाव रीसते जा रहे साथ साथ
भरती रिक्तता की जमीन वेदना लेती अंकुर
आह घनी भूत व्याधि विरह व्याकुल
उगंने लगे करूण कपोल कोमल तल तटक रहा
असीम बहती वेदना पवन
हिलते डूलते कपोल करते जख्म घात अनेक
झंझावात अंधी बनी अब प्राण चाहते मिले ना त्राण
कलरव कोलाहल कठोर काल क्रूरता का
नही निश्चित तन प्राण बस सकेंगे अब
चेतन अदृश्य विकसित इसी मध्य
जाल सुरभित पवन मिल रश्मि रथी राह दिखता
ओर यह संकेत गगन मुस्कान रहस्यमय
धैर्य धारित ध्यान धवल प्रभा एकटक जगती निहारे
चेतन सचेत तत्व क्रियाशील गति देकर
व्यक्ति व्याधि वेदना विरह मिलन प्रभा की आश देती।
छगन लाल गर्ग ।