तडप हैं अज्ञात अति तीव्र चुभन
अकारण रिक्तता हुई जाती व्याप्त तन भीतर
असंख्य घाव रीसते जा रहे साथ साथ
भरती रिक्तता की जमीन वेदना लेती अंकुर
आह घनी भूत व्याधि विरह व्याकुल
उगंने लगे करूण कपोल कोमल तल तटक रहा
असीम बहती वेदना पवन
हिलते डूलते कपोल करते जख्म घात अनेक
झंझावात अंधी बनी अब प्राण चाहते मिले ना त्राण
कलरव कोलाहल कठोर काल क्रूरता का
नही निश्चित तन प्राण बस सकेंगे अब
चेतन अदृश्य विकसित इसी मध्य
जाल सुरभित पवन मिल रश्मि रथी राह दिखता
ओर यह संकेत गगन मुस्कान रहस्यमय
धैर्य धारित ध्यान धवल प्रभा एकटक जगती निहारे
चेतन सचेत तत्व क्रियाशील गति देकर
व्यक्ति व्याधि वेदना विरह मिलन प्रभा की आश देती।
छगन लाल गर्ग ।
अकारण रिक्तता हुई जाती व्याप्त तन भीतर
असंख्य घाव रीसते जा रहे साथ साथ
भरती रिक्तता की जमीन वेदना लेती अंकुर
आह घनी भूत व्याधि विरह व्याकुल
उगंने लगे करूण कपोल कोमल तल तटक रहा
असीम बहती वेदना पवन
हिलते डूलते कपोल करते जख्म घात अनेक
झंझावात अंधी बनी अब प्राण चाहते मिले ना त्राण
कलरव कोलाहल कठोर काल क्रूरता का
नही निश्चित तन प्राण बस सकेंगे अब
चेतन अदृश्य विकसित इसी मध्य
जाल सुरभित पवन मिल रश्मि रथी राह दिखता
ओर यह संकेत गगन मुस्कान रहस्यमय
धैर्य धारित ध्यान धवल प्रभा एकटक जगती निहारे
चेतन सचेत तत्व क्रियाशील गति देकर
व्यक्ति व्याधि वेदना विरह मिलन प्रभा की आश देती।
छगन लाल गर्ग ।