नही देखता तुम्हें
इस कारण कि तुम
असीम सौंदर्य नूर बिम्ब
या कि जगत का
इकलौता आनंद कोष
या कि दिखता तुम मिस
परमात्मा का निखार या
कोमलतम
कल्पनाओ का साकार
मूर्त सौंदर्य
केवल कारण यह
कि तुम्हारा यह
अवगुण्ठित
निर्मल लावण्य
अतुलनीय रूप की पराकाष्ठा
झलक मात्र
सृजक की
जिसने बनाया तुम्हें
शायद सीढी बनो
दोनों ही दशाओं में
समय की आरंभ ओर अंत
हर बौध पाता
सरूप भी कुरूप भी
केवल उसका एहसास
दिलाने का
साक्षात मूर्त रूप बने तुम
यही कारण मात्र
परमसत्ता का
अवबोध होने
तक देखना चाहता
सौंदर्य बिम्ब तुम्हारा ।
छगन लाल गर्ग ।
इस कारण कि तुम
असीम सौंदर्य नूर बिम्ब
या कि जगत का
इकलौता आनंद कोष
या कि दिखता तुम मिस
परमात्मा का निखार या
कोमलतम
कल्पनाओ का साकार
मूर्त सौंदर्य
केवल कारण यह
कि तुम्हारा यह
अवगुण्ठित
निर्मल लावण्य
अतुलनीय रूप की पराकाष्ठा
झलक मात्र
सृजक की
जिसने बनाया तुम्हें
शायद सीढी बनो
दोनों ही दशाओं में
समय की आरंभ ओर अंत
हर बौध पाता
सरूप भी कुरूप भी
केवल उसका एहसास
दिलाने का
साक्षात मूर्त रूप बने तुम
यही कारण मात्र
परमसत्ता का
अवबोध होने
तक देखना चाहता
सौंदर्य बिम्ब तुम्हारा ।
छगन लाल गर्ग ।