कहता तो हूँ शायद सुनो
अनभिज्ञता नही
अनेक बार सुना हुआ सच
ओर तुम्हारी सहमति पाया
आज नही भाता तुम्हें
कारणवश
अब यह सत्य अवसर क्षण
तुम्हें करता इंगित
अब तक दूसरे की दशा से जुडा था
पर आज
जुडना चाहता तुम्हारे मद से
तुम अब तक रहे निर्णायक
अन्यों के परिष्कार निमित्त
बताते रहे
धर्म कर्म फर्ज कुछ इसी तरह
कि दिव्य रूप
तुम्हें करता रहा ख्यात
पर आज क्या हुआ तुम्हे
जब अपनों के अपनत्व की घडी मे
वक्त की मार से मूर्छित तुम्हारे स्वजन
निहारते हैं तुम्हारी ओर
गिरते आँसू देखते हो बयान करते
उनकी विवश दारूण दशा
ओर तुम परायों से बदतर हुए
लेते उनकी कसक भरी
व्यथा का आनंद
तुम्हारा यही दोगलापन
कहता मौन होकर
तुम ही हो
आज की सभ्य
सुसंस्कृत धरा के यशस्वी मानव
यही तुम्हारी सर्व मान्य परिभाषा ।
अनभिज्ञता नही
अनेक बार सुना हुआ सच
ओर तुम्हारी सहमति पाया
आज नही भाता तुम्हें
कारणवश
अब यह सत्य अवसर क्षण
तुम्हें करता इंगित
अब तक दूसरे की दशा से जुडा था
पर आज
जुडना चाहता तुम्हारे मद से
तुम अब तक रहे निर्णायक
अन्यों के परिष्कार निमित्त
बताते रहे
धर्म कर्म फर्ज कुछ इसी तरह
कि दिव्य रूप
तुम्हें करता रहा ख्यात
पर आज क्या हुआ तुम्हे
जब अपनों के अपनत्व की घडी मे
वक्त की मार से मूर्छित तुम्हारे स्वजन
निहारते हैं तुम्हारी ओर
गिरते आँसू देखते हो बयान करते
उनकी विवश दारूण दशा
ओर तुम परायों से बदतर हुए
लेते उनकी कसक भरी
व्यथा का आनंद
तुम्हारा यही दोगलापन
कहता मौन होकर
तुम ही हो
आज की सभ्य
सुसंस्कृत धरा के यशस्वी मानव
यही तुम्हारी सर्व मान्य परिभाषा ।
आजाद भारत मे
सुनते हैं
पहली बार आया सुशासन
इसी कारण
अब नही कही आतंकी
न कही भ्रष्टाचार
जागरण युग का सूत्रधार
हमारा सुशासन
हर ओर केवल तरक्की
सपनों का साकार साक्षात
खुशहाली का अजीब उन्माद
एक स्वप्निल सुनहरे भावी की
सुगबुगाहट
बडा अजीबोगरीब परिवर्तन
हो रहा
चारों दिशाओं में देश भीतर
झूम रही
परिवर्तन की खुशबू
सुशासन की हवा
हर ओर
टी वी अखबार
ओर हर कार्यकर्ता
चर्चा का चिताकर्षक बाजार
पूरे उफान पर
हर सामान्य कार्य
पहले कहा जाता रूटीन वाला
नही रहा सामान्य
अब बन गया विशिष्ट
ओर रंग रहा अखबार के पृष्ठ
केवल प्रगति ओर प्रगति
पोस्टर शिवाय कुछ नही
कही कोने मे धूमिल धूल चाटते
काम लायक
हुए बेमतलब के समाचार
भूले से
अकारण असामयिक
टी वी के
आंशिक समाचार भी
आज ले चूके
परिवर्तन का पाठ
केवल प्रगति मय
हमारा भारत
न कोई समस्या न कोई अभाव
यह सब सुखद काल
मात्र दो वर्ष की लघु अवधि
हुआ
दिव्य भारत
हर क्षेत्र मे परिपक्व समृद्ध
विशालकाय
उधर यथार्थ से अनभिज्ञ
विरोधी दल
अनपढ गरीब दलित
शून्य मति देश द्रोही
नही अक्ल सामर्थ्य उनमें
कर सके
बहुमत का निरादर
असलियत मात्र यह
कहते रहें
थोथा चना बाजे घना
चलो बजने दो
आम आदमी को प्रगति की हवा
अभी रास आने दो
ताकि स्वयं बन सके
इसी हवा का अंश
प्रगतिशील
वाक् पटु ओर देश प्रेमी
बिना किसी
इम्तिहान की उपाधि पाने मे
सक्षमता हासिल करे
यही मकसद
राष्ट्रीय प्रेम गंगा संगम
होता रहे हर वर्ष
ओर भौपू बन हर व्यक्ति
चिल्ला चिल्ला कर कहें
प्रगतिशील नित्य
विश्व मार्गदर्शक
ओर हर वर्ग साथ विकास
गूंजन करता रहे नारा
हर शासन वर्ष गांठ संमेलन पर
गर्व करो कहो
जय भारत माता की
नमन मातृभूमि तुझे
प्रजातंत्र की जय
ओर सुशासन के दीपक की जय।
छगन लाल गर्ग ।
सुनते हैं
पहली बार आया सुशासन
इसी कारण
अब नही कही आतंकी
न कही भ्रष्टाचार
जागरण युग का सूत्रधार
हमारा सुशासन
हर ओर केवल तरक्की
सपनों का साकार साक्षात
खुशहाली का अजीब उन्माद
एक स्वप्निल सुनहरे भावी की
सुगबुगाहट
बडा अजीबोगरीब परिवर्तन
हो रहा
चारों दिशाओं में देश भीतर
झूम रही
परिवर्तन की खुशबू
सुशासन की हवा
हर ओर
टी वी अखबार
ओर हर कार्यकर्ता
चर्चा का चिताकर्षक बाजार
पूरे उफान पर
हर सामान्य कार्य
पहले कहा जाता रूटीन वाला
नही रहा सामान्य
अब बन गया विशिष्ट
ओर रंग रहा अखबार के पृष्ठ
केवल प्रगति ओर प्रगति
पोस्टर शिवाय कुछ नही
कही कोने मे धूमिल धूल चाटते
काम लायक
हुए बेमतलब के समाचार
भूले से
अकारण असामयिक
टी वी के
आंशिक समाचार भी
आज ले चूके
परिवर्तन का पाठ
केवल प्रगति मय
हमारा भारत
न कोई समस्या न कोई अभाव
यह सब सुखद काल
मात्र दो वर्ष की लघु अवधि
हुआ
दिव्य भारत
हर क्षेत्र मे परिपक्व समृद्ध
विशालकाय
उधर यथार्थ से अनभिज्ञ
विरोधी दल
अनपढ गरीब दलित
शून्य मति देश द्रोही
नही अक्ल सामर्थ्य उनमें
कर सके
बहुमत का निरादर
असलियत मात्र यह
कहते रहें
थोथा चना बाजे घना
चलो बजने दो
आम आदमी को प्रगति की हवा
अभी रास आने दो
ताकि स्वयं बन सके
इसी हवा का अंश
प्रगतिशील
वाक् पटु ओर देश प्रेमी
बिना किसी
इम्तिहान की उपाधि पाने मे
सक्षमता हासिल करे
यही मकसद
राष्ट्रीय प्रेम गंगा संगम
होता रहे हर वर्ष
ओर भौपू बन हर व्यक्ति
चिल्ला चिल्ला कर कहें
प्रगतिशील नित्य
विश्व मार्गदर्शक
ओर हर वर्ग साथ विकास
गूंजन करता रहे नारा
हर शासन वर्ष गांठ संमेलन पर
गर्व करो कहो
जय भारत माता की
नमन मातृभूमि तुझे
प्रजातंत्र की जय
ओर सुशासन के दीपक की जय।
छगन लाल गर्ग ।