Friday, June 17, 2016

सुशासन के दीपक

कहता तो हूँ शायद सुनो
अनभिज्ञता नही
अनेक बार सुना हुआ सच
ओर तुम्हारी सहमति पाया
आज नही भाता तुम्हें
कारणवश
अब यह सत्य अवसर क्षण
तुम्हें करता इंगित
अब तक दूसरे की दशा से जुडा था
पर आज
जुडना चाहता तुम्हारे मद से
तुम अब तक रहे निर्णायक
अन्यों के परिष्कार निमित्त
बताते रहे
धर्म कर्म फर्ज कुछ इसी तरह
कि दिव्य रूप
तुम्हें करता रहा ख्यात
पर आज क्या हुआ तुम्हे
जब अपनों के अपनत्व की घडी मे
वक्त की मार से मूर्छित तुम्हारे स्वजन
निहारते हैं तुम्हारी ओर
गिरते आँसू देखते हो बयान करते
उनकी विवश दारूण दशा
ओर तुम परायों से बदतर हुए
लेते उनकी कसक भरी
व्यथा का आनंद
तुम्हारा यही दोगलापन
कहता मौन होकर
तुम ही हो
आज की सभ्य
सुसंस्कृत धरा के यशस्वी मानव
यही तुम्हारी सर्व मान्य परिभाषा

आजाद भारत मे
सुनते हैं
पहली बार आया सुशासन
इसी कारण
अब नही कही आतंकी
कही भ्रष्टाचार
जागरण युग का सूत्रधार
हमारा सुशासन
हर ओर केवल तरक्की
सपनों का साकार साक्षात
खुशहाली का अजीब उन्माद
एक स्वप्निल सुनहरे भावी की
सुगबुगाहट
बडा अजीबोगरीब परिवर्तन
हो रहा
चारों दिशाओं में देश भीतर
झूम रही
परिवर्तन की खुशबू
सुशासन की हवा
हर ओर
टी वी अखबार
ओर हर कार्यकर्ता
चर्चा का चिताकर्षक बाजार
पूरे उफान पर
हर सामान्य कार्य
पहले कहा जाता रूटीन वाला
नही रहा सामान्य
अब बन गया विशिष्ट
ओर रंग रहा अखबार के पृष्ठ
केवल प्रगति ओर प्रगति
पोस्टर शिवाय कुछ नही
कही कोने मे धूमिल धूल चाटते
काम लायक
हुए बेमतलब के समाचार
भूले से
अकारण असामयिक
टी वी के
आंशिक समाचार भी
आज ले चूके
परिवर्तन का पाठ
केवल प्रगति मय
हमारा भारत
कोई समस्या कोई अभाव
यह सब सुखद काल
मात्र दो वर्ष की लघु अवधि
हुआ
दिव्य भारत
हर क्षेत्र मे परिपक्व समृद्ध
विशालकाय
उधर यथार्थ से अनभिज्ञ
विरोधी दल
अनपढ गरीब दलित
शून्य मति देश द्रोही
नही अक्ल सामर्थ्य उनमें
कर सके
बहुमत का निरादर
असलियत मात्र यह
कहते रहें
थोथा चना बाजे घना
चलो बजने दो
आम आदमी को प्रगति की हवा
अभी रास आने दो
ताकि स्वयं बन सके
इसी हवा का अंश
प्रगतिशील
वाक् पटु ओर देश प्रेमी
बिना किसी
इम्तिहान की उपाधि पाने मे
सक्षमता हासिल करे
यही मकसद
राष्ट्रीय प्रेम गंगा संगम
होता रहे हर वर्ष
ओर भौपू बन हर व्यक्ति
चिल्ला चिल्ला कर कहें
प्रगतिशील नित्य
विश्व मार्गदर्शक
ओर हर वर्ग साथ विकास
गूंजन करता रहे नारा
हर शासन वर्ष गांठ संमेलन पर
गर्व करो कहो
जय भारत माता की
नमन मातृभूमि तुझे
प्रजातंत्र की जय
ओर सुशासन के दीपक की जय।
छगन लाल गर्ग