बूरा तो नही मानोंगे
बात ही ऐसी हैं कि झिझकता हूँ कहते
आजकल एक नवीन युग का श्रीगणेश हुआ
हमारे हिन्दूस्तान मे
ओर अब लगने लगा हैं कि बहुत महान हम
हर क्षेत्र मे सर्वोत्तम
ओर विशेषकर धर्म का आत्मीय साक्षात्कार
इससे पहले नही हो पाया
अब लगता है महान हूँ मैं
इस कारण कि हिन्दू हूँ
यह प्रतीति पहले न थी
राजनीतिक गलियारे ले आये
व्यक्ति गरिमामय जीवन का सार
ओर अब लगने लगा सार्थक मेरा जीवन
बहुत समय बाद जागी आत्म चेतना
ओर अब निश्चित हो गया
अपने जीवन का लक्ष्य
हिन्दूस्तान का कर्ज चुकता होगा तभी
जब मैं बन सकूँ सही अर्थों में सनातन हिन्दू ।
छगन लाल गर्ग ।
बात ही ऐसी हैं कि झिझकता हूँ कहते
आजकल एक नवीन युग का श्रीगणेश हुआ
हमारे हिन्दूस्तान मे
ओर अब लगने लगा हैं कि बहुत महान हम
हर क्षेत्र मे सर्वोत्तम
ओर विशेषकर धर्म का आत्मीय साक्षात्कार
इससे पहले नही हो पाया
अब लगता है महान हूँ मैं
इस कारण कि हिन्दू हूँ
यह प्रतीति पहले न थी
राजनीतिक गलियारे ले आये
व्यक्ति गरिमामय जीवन का सार
ओर अब लगने लगा सार्थक मेरा जीवन
बहुत समय बाद जागी आत्म चेतना
ओर अब निश्चित हो गया
अपने जीवन का लक्ष्य
हिन्दूस्तान का कर्ज चुकता होगा तभी
जब मैं बन सकूँ सही अर्थों में सनातन हिन्दू ।
छगन लाल गर्ग ।