Wednesday, June 15, 2016

फक्त छू लो

फक्त छू लो ना मुझे
स्त्रोत ऊर्जा थोडी पा लूं तुमसे
उकता गया जमाने से
तपन बढ देह कोयला हुई
थोडी दो ना छाया तुम्हारी
मेरे रोम रोम भर जाऐ
विश्रृंखल हुआ जाता वर्ण वर्ण मेरा
हर कदम कदम मेरा
हताश पराजित बेहोशी लिए
दो ना सहारा
सत्य यह व्यतीत हुआ सब कुछ
पर लगता भीतर कुछ रह गया बाकी
बता दो ना अवशेष मेरा
मिल सके सबल सहारा
शायद पाना रहा अभी अंतिम किनारा
प्राण बहुत लंबा चला
जीवन भर सुख आशा करता
अब शायद यह आखिरी विनय
हो सके तो छू लो मुझको
मेरे प्राण अमरत्व पा जाए
हल्के हो लो अब प्राण तू मेरे
भंवर हलाहल भांवरे पडती
आओ अब कुछ पहचान बना ले
जीवन जाते राज समझ ले
शेष भरने का रहस्य सूक्ष्म बन
प्राण राग सा भीतर भर ले
आओ ना जरा छू लो मुझे
छगन लाल गर्ग