फक्त छू लो ना मुझे
स्त्रोत ऊर्जा थोडी पा लूं तुमसे
उकता गया जमाने से
तपन बढ देह कोयला हुई
थोडी दो ना छाया तुम्हारी
मेरे रोम रोम भर जाऐ
विश्रृंखल हुआ जाता वर्ण वर्ण मेरा
हर कदम कदम मेरा
हताश पराजित बेहोशी लिए
दो ना सहारा
सत्य यह व्यतीत हुआ सब कुछ
पर लगता भीतर कुछ रह गया बाकी
बता दो ना अवशेष मेरा
मिल सके सबल सहारा
शायद पाना रहा अभी अंतिम किनारा
प्राण बहुत लंबा चला
जीवन भर सुख आशा करता
अब शायद यह आखिरी विनय
हो सके तो छू लो मुझको
मेरे प्राण अमरत्व पा जाए
हल्के हो लो अब प्राण तू मेरे
भंवर हलाहल भांवरे पडती
आओ अब कुछ पहचान बना ले
जीवन जाते राज समझ ले
शेष भरने का रहस्य सूक्ष्म बन
प्राण राग सा भीतर भर ले
आओ ना जरा छू लो मुझे ।
छगन लाल गर्ग ।
स्त्रोत ऊर्जा थोडी पा लूं तुमसे
उकता गया जमाने से
तपन बढ देह कोयला हुई
थोडी दो ना छाया तुम्हारी
मेरे रोम रोम भर जाऐ
विश्रृंखल हुआ जाता वर्ण वर्ण मेरा
हर कदम कदम मेरा
हताश पराजित बेहोशी लिए
दो ना सहारा
सत्य यह व्यतीत हुआ सब कुछ
पर लगता भीतर कुछ रह गया बाकी
बता दो ना अवशेष मेरा
मिल सके सबल सहारा
शायद पाना रहा अभी अंतिम किनारा
प्राण बहुत लंबा चला
जीवन भर सुख आशा करता
अब शायद यह आखिरी विनय
हो सके तो छू लो मुझको
मेरे प्राण अमरत्व पा जाए
हल्के हो लो अब प्राण तू मेरे
भंवर हलाहल भांवरे पडती
आओ अब कुछ पहचान बना ले
जीवन जाते राज समझ ले
शेष भरने का रहस्य सूक्ष्म बन
प्राण राग सा भीतर भर ले
आओ ना जरा छू लो मुझे ।
छगन लाल गर्ग ।