मैं हूँ भी
होना मेरा कहां हुआ साबित
तुम देते रहो सबूत
मेरे वजूद के
विधालय शिक्षा की डिग्री
मेरा खानदान जाति ओर रिश्ते
बहुत कुछ पिटारा रखते
कि बनती पहचान
पर यह सब तुम्हारे लिए
तुम्हारा गणित
पर अभी मैं नही मेरा भी मेरे लिए
अमिट हैं मेरी प्यास
स्वयं का सत्य जानने की भूख
घनी अंधी कंदराओं मे भटकती
विवर शून्य बनी संसृति
कठोर आघात से बिखेरती स्वयं को
परमाणु बनकर
परम यह तत्व बनकर पहचान पाना
बहुत हुआ जाता जटिल
सत्य की प्यास मेरी
अमिट रही बहुत विकलावस्था
मैं बहती भावनाओ की सरिता
खोना चाहती सागर
अथाह शून्य
अदृश्य होना चाहता
अदृश्य संग
ओर यह अस्तित्व केवल
इसी कारण
कि पा सकूं झलक सत्य की
होना तो निश्चित
एक दिन की सतत मनुहार मेरी
आओ तुम अहो भाग्य
धन्य घडी कि मैं साबित कर सकूँ
मेरा होना मेरी तरह
सत्य केवल सत्य ।
छगन लाल गर्ग ।
होना मेरा कहां हुआ साबित
तुम देते रहो सबूत
मेरे वजूद के
विधालय शिक्षा की डिग्री
मेरा खानदान जाति ओर रिश्ते
बहुत कुछ पिटारा रखते
कि बनती पहचान
पर यह सब तुम्हारे लिए
तुम्हारा गणित
पर अभी मैं नही मेरा भी मेरे लिए
अमिट हैं मेरी प्यास
स्वयं का सत्य जानने की भूख
घनी अंधी कंदराओं मे भटकती
विवर शून्य बनी संसृति
कठोर आघात से बिखेरती स्वयं को
परमाणु बनकर
परम यह तत्व बनकर पहचान पाना
बहुत हुआ जाता जटिल
सत्य की प्यास मेरी
अमिट रही बहुत विकलावस्था
मैं बहती भावनाओ की सरिता
खोना चाहती सागर
अथाह शून्य
अदृश्य होना चाहता
अदृश्य संग
ओर यह अस्तित्व केवल
इसी कारण
कि पा सकूं झलक सत्य की
होना तो निश्चित
एक दिन की सतत मनुहार मेरी
आओ तुम अहो भाग्य
धन्य घडी कि मैं साबित कर सकूँ
मेरा होना मेरी तरह
सत्य केवल सत्य ।
छगन लाल गर्ग ।