Monday, June 13, 2016

मर्यादा के नाते

 कंठ बीच शब्दों को रोकता हूँ 
मर्यादा के नाते
कहीं उपहास न हो 

सत्य पर 
असत्य की एक ओर परत 
चढाता हूँ 
सभ्य ओर लोकप्रिय नेता हैं 
शासकीय दल से हैं 
पिछले दो साल से
सरकारी स्कूल मे
बच्चियो के लिए 
ट्यूब वेल खुदाने
विधायक मद से निवेदन 
करता आया हूँ 
आश्वासन आज भी मिला हैं 
पर रूटिन वाला 
मैं हाथ जोडे याचक बन खडा हूँ 
समय नहीं हैं 
ओर भी लोग हैं 
आप जाये
नेताजी का फरमान सुना
मैं फिर एक बार
विनित हुआ 
बच्चियो पर रहम करे सर
पानी की विकट समस्या हैं 
उल्हाना देते बोले
स्कूल के प्रोग्राम मे
गाव वालो के अलावा 
हमे बुलाया आपने 
हमारे धन्धे का ध्यान रखा आपने
जो हम आपका रखे
जवाब नहीं रखता मैं 
कुछ सत्य सटपटा कर
कंठ बाहर आता
आज फिर एक बार
सत्य असत्य तले
दब गया
हजारो सत्य 
युग साम्यता 
अस्तित्व के लिए
दबते रहते हैं ।
छगनलाल गर्ग।