कहानी नही सुनता कोई
नही रही रूचि
हल्की नही जिन्दगी
की सुननी पडे कहानी
अब हर क्षण गूँथता जाता अपना
मकडजाल
कि अज्ञात आपदाओ मे फसते अनजान
युग की नवल परिमार्जित समस्याओ का हल
आखिरी निष्कर्ष के दौर मे
हमारे प्रबुद्ध अर्थ शास्त्री
राजनीतिज्ञ ओर नीति निर्धारक
करते सतत मंथन
ओर निष्कर्ष का अमृत अब बेताब
मानव जाति को अमृत्व देने
पर मूढताओं घिरा अबोध विरोधी
देत्य बन बन रहा बाधक
बहती अमृत धारा की सनातन कहानी
का भी विरोधी
असलियत पर उतारू हुआ
नही सुनता ओर न सुनने देता
नवयुग को अमृत्व प्राप्ति की कहानी
यही कारण समस्या बनती जाती
दैत्याकार
सुनने दो सनातन अमृतमय चेतना
कि निवृत्त हो सके मात्र कहानी स्त्रोत से ही
आज के ज्वलंत क्षणों मे
उभरती हजारों कहानी भस्म हो सके
मात्र एकाध कहानी से
बशर्ते हो सनातनी ।
छगन लाल गर्ग ।
नही रही रूचि
हल्की नही जिन्दगी
की सुननी पडे कहानी
अब हर क्षण गूँथता जाता अपना
मकडजाल
कि अज्ञात आपदाओ मे फसते अनजान
युग की नवल परिमार्जित समस्याओ का हल
आखिरी निष्कर्ष के दौर मे
हमारे प्रबुद्ध अर्थ शास्त्री
राजनीतिज्ञ ओर नीति निर्धारक
करते सतत मंथन
ओर निष्कर्ष का अमृत अब बेताब
मानव जाति को अमृत्व देने
पर मूढताओं घिरा अबोध विरोधी
देत्य बन बन रहा बाधक
बहती अमृत धारा की सनातन कहानी
का भी विरोधी
असलियत पर उतारू हुआ
नही सुनता ओर न सुनने देता
नवयुग को अमृत्व प्राप्ति की कहानी
यही कारण समस्या बनती जाती
दैत्याकार
सुनने दो सनातन अमृतमय चेतना
कि निवृत्त हो सके मात्र कहानी स्त्रोत से ही
आज के ज्वलंत क्षणों मे
उभरती हजारों कहानी भस्म हो सके
मात्र एकाध कहानी से
बशर्ते हो सनातनी ।
छगन लाल गर्ग ।