Wednesday, June 15, 2016

विश्व व्याकुल

विश्व व्याकुल व्याधियों से
नित्य नवनीत शैलियों में
रोग रूधिर रसायन बनकर
दौडने लगे अनचाहा आवेग लेकर
व्यक्ति वात उदरस्थ वेदना में
ढूँढता निदान देह रूग्णता के
अपार अनुभव श्रृंखला मे
आर्युवेद महर्षि दे गये ओषधि भी
हिन्दूस्तानी सभी समर्थ शक्तिमय
भर देते नव प्राण बन ऊर्जा रूप मे
हृदय हमारा हमराही हर हारे हृदय का
बनता संबल सर्वस्व समर्पित कर
जब तक रहती चेतनता देह की
निर्बल बल बनकर जीवन करता अर्पित
आह मानवीयता की प्रतिमूर्ति भारतीय मेरे
हर अनाथ दरिद्र दारूण दुखी का प्राण बनकर
करत लेते तुम स्वयं के सब हित अर्पित
नमन तुझे मेरे हिन्द हिंदी हिन्दूस्तान
तू मेरे प्राणों पण मे प्रतिपल होता विकसित ।
छगन लाल गर्ग ।