दूसरा भी होगा सही
नही मान सकता
विरोधी तो कभी नही
हो सकता सत्य
असत्य केवल वही जीता
नही आवश्यकता किसी प्रमाण की
याकि हो वाद विवाद तर्क वगैरह
यह जो मन मेरा ओर अस्मिता भी
नही निर्बल कि विश्वास करूं
कि खुद कभी हो सकता
अनजान या अज्ञात
हर सवाल का जवाब वही सत्य
जिसे स्वीकृति मिले मेरी
अब समझते नही तुम
यही कारण व्यक्ति को बना देता शेर
सीना इसी कारण बन जाता चौडा
समझो गुर यदि चाहते बढना
ओर वक्त को अपने बाहुपाश बांधना
केवल यही बह्मास्त्र
कि छोडो सत्य की परीक्षा
वही सत्य शात्विक ओर युग सार
जो तुम कहते
दूसरे ना आज सही ना कभी रहे ।
छगन लाल गर्ग ।
नही मान सकता
विरोधी तो कभी नही
हो सकता सत्य
असत्य केवल वही जीता
नही आवश्यकता किसी प्रमाण की
याकि हो वाद विवाद तर्क वगैरह
यह जो मन मेरा ओर अस्मिता भी
नही निर्बल कि विश्वास करूं
कि खुद कभी हो सकता
अनजान या अज्ञात
हर सवाल का जवाब वही सत्य
जिसे स्वीकृति मिले मेरी
अब समझते नही तुम
यही कारण व्यक्ति को बना देता शेर
सीना इसी कारण बन जाता चौडा
समझो गुर यदि चाहते बढना
ओर वक्त को अपने बाहुपाश बांधना
केवल यही बह्मास्त्र
कि छोडो सत्य की परीक्षा
वही सत्य शात्विक ओर युग सार
जो तुम कहते
दूसरे ना आज सही ना कभी रहे ।
छगन लाल गर्ग ।