Monday, June 13, 2016

मार्मिक क्षण

मार्मिक क्षण आओ न घेरो मुझे 
तुम्ही तो मेरे हो 
साथ कहां छोड़ते हो

अन्यथा आज का जमाना
कहां अपनो का साथ देता हैं 
मेरे साथी
दर्द पराया मेरा साझा 
मेरे साथ तुम्ही हो
जो करते हो
खुसर फुसर करने वाले
कहां ईर्ष्या करते हैं हम दोनों की
मित्र मेरे 
रस बस गये अब तुम 
मेरे अस्तित्व से
देखो साथ निभाना
दुसरो का साथ 
पता नहीं 
मेरे विश्वास को सहारा देगा
अब क्यों आगा पिछा देखू
तुम ओर मैं 
पर्याय हैं 
एक दूसरे के
तुम संताप नहीं मेरे 
आधार हो
उष्मा हो
अधिकतम अनुपम
गति की ज्वाला भी
प्रेरणा भी वेदना राग भी
चेतना संचार भी
भक्ति की शक्ति भी
परमात्मा की अनुपम भैट भी
साथी मेरे 
बने रहना तुम
प्राणो के अंत तक
सृजक के बुलाने तक
साथी साथ निभाना।