अनदेखी अनुभूति
अहसास केवल अदृश्य का
कल्पना का इन्द्र धनुष
रश्मियों का रंगीन आशक्त बिम्ब
इन्द्रियों का सत्य भी असत्य भी
यही तो हैं शब्द
जिनसे अंकित करना चाहता
अनुभूति का सत्य
ओर दुर्भाग्य यह भी
जब जब करता हूँ प्रयास
उकेरने के सत्य
फिसल जाता शब्दो के शिकंजे से
सत्य
नही रह पाता फिर सत्य शब्द पहनते ही
ओर मैं मायूस हताश
लकीर का फकीर बना
उकेरने लगता हूँ भाषा शास्त्रीय
जो नही रही कभी सरल
ओर जटिलता का ढोंग
नही बन सकता सत्य का आकार
क्योकि सत्य नमनीय
द्रव्यमान तरल सुगंध भरा स्त्रोत
जहां कबीर मीरां बुद्ध
नित्य करते है निर्मल जल विहार
हमारी जटिलता के रहते
मुझे भी लगता बहुत दूर हैं हम
भीतरी सत्य से ।
छगन लाल गर्ग ।
अहसास केवल अदृश्य का
कल्पना का इन्द्र धनुष
रश्मियों का रंगीन आशक्त बिम्ब
इन्द्रियों का सत्य भी असत्य भी
यही तो हैं शब्द
जिनसे अंकित करना चाहता
अनुभूति का सत्य
ओर दुर्भाग्य यह भी
जब जब करता हूँ प्रयास
उकेरने के सत्य
फिसल जाता शब्दो के शिकंजे से
सत्य
नही रह पाता फिर सत्य शब्द पहनते ही
ओर मैं मायूस हताश
लकीर का फकीर बना
उकेरने लगता हूँ भाषा शास्त्रीय
जो नही रही कभी सरल
ओर जटिलता का ढोंग
नही बन सकता सत्य का आकार
क्योकि सत्य नमनीय
द्रव्यमान तरल सुगंध भरा स्त्रोत
जहां कबीर मीरां बुद्ध
नित्य करते है निर्मल जल विहार
हमारी जटिलता के रहते
मुझे भी लगता बहुत दूर हैं हम
भीतरी सत्य से ।
छगन लाल गर्ग ।