Monday, June 13, 2016

विरान जिन्दगी

कातर विरान जिन्दगी ताकती किनारा
हूँ मझधार तीव्र प्रवाह लगे प्राण हारा ।
भूला कैसे तारणहार तेरा नाम सहारा ।

संघर्षरहा जीवन मृत्यु टूटा नातासारा।
ममत्व कितनाआज जाना जीवन तेरा।
जोश कितना जिजिविषा उन्माद घेरा।
हालात विपदा प्राण फिर जिये सवेरा।
अंकुर फूटे जीवन घेरे हो माया बसेरा।