करने दो
तैयारी
अब नही रह सकता पीछे
बढाना चाहता कदम
विकास की राह निरंतर
अब आया अवसर कहने का
सबका साथ सबका विकास
कौन समझता इससे पहले
कि हो सकता विकास भी
बिना आम के
पहली बार शायद हिस्सेदारी मिली
आम व्यवस्था मे व्यक्ति को
विकास करने की
अब उठ चुका हूँ मैं विकास निमित्त
नही रह सकता पीछे
मुझे केवल इतना सा अवसर देदो
बताओ रास्ता ओर दो सामर्थ्य
कि बढ सकूँ विकास की राह
आज तक छिपाकर रखी मुझसे
अब आने दो बाहर मेरे उपयोगार्थ ।
छगन लाल गर्ग ।
अब नही रह सकता पीछे
बढाना चाहता कदम
विकास की राह निरंतर
अब आया अवसर कहने का
सबका साथ सबका विकास
कौन समझता इससे पहले
कि हो सकता विकास भी
बिना आम के
पहली बार शायद हिस्सेदारी मिली
आम व्यवस्था मे व्यक्ति को
विकास करने की
अब उठ चुका हूँ मैं विकास निमित्त
नही रह सकता पीछे
मुझे केवल इतना सा अवसर देदो
बताओ रास्ता ओर दो सामर्थ्य
कि बढ सकूँ विकास की राह
आज तक छिपाकर रखी मुझसे
अब आने दो बाहर मेरे उपयोगार्थ ।
छगन लाल गर्ग ।