बुरा तो नही मानोगे
सिर्फ एक प्रश्न हर बार
रह जाता निरूत्तर
अंदाज सत्य नही केवल कामचलाऊ आधार
कुछ अर्से खुद का खुद को बहलाना मात्र
जब से विमोहित होकर जुडा
हिन्दी कविता कम्युनिटी से
अच्छा लगा
साहित्य संगत अवसर पाने का सपना
होगा पूरा
ओर नवल अंकुर कपोल सी कोमल
सुमधुर राग से सजी कविताई
मिलेंगी पढने को
फक्त स्वयं से जूझते विवश अपने से
बेबूझ परसाई जीते मेरी तरह
ओर कविवर क्यो हैं मौन
आमंत्रित करो ना राग प्रहरी
कि नेह निर्झर शब्द बन कर बहे
मानव धरातल
ओर तमाम शुष्क तन की रेत भीगे
रस प्रवाह भीतरी स्त्रोत का उदगम
तुम ही करो ना
ओर व्यर्थ होगा अन्यत्र प्रयास
बुरा मत मानना केवल आत्मीय निवेदन मेरा
सुनते हो ना पुकारता हूँ कवि तुम्हें
करो नाम सार्थक अपना ।
छगन लाल गर्ग ।
सिर्फ एक प्रश्न हर बार
रह जाता निरूत्तर
अंदाज सत्य नही केवल कामचलाऊ आधार
कुछ अर्से खुद का खुद को बहलाना मात्र
जब से विमोहित होकर जुडा
हिन्दी कविता कम्युनिटी से
अच्छा लगा
साहित्य संगत अवसर पाने का सपना
होगा पूरा
ओर नवल अंकुर कपोल सी कोमल
सुमधुर राग से सजी कविताई
मिलेंगी पढने को
फक्त स्वयं से जूझते विवश अपने से
बेबूझ परसाई जीते मेरी तरह
ओर कविवर क्यो हैं मौन
आमंत्रित करो ना राग प्रहरी
कि नेह निर्झर शब्द बन कर बहे
मानव धरातल
ओर तमाम शुष्क तन की रेत भीगे
रस प्रवाह भीतरी स्त्रोत का उदगम
तुम ही करो ना
ओर व्यर्थ होगा अन्यत्र प्रयास
बुरा मत मानना केवल आत्मीय निवेदन मेरा
सुनते हो ना पुकारता हूँ कवि तुम्हें
करो नाम सार्थक अपना ।
छगन लाल गर्ग ।