मेरी अभिव्यक्ति
आत्म साक्षात्कार नही
अनुभूति का व्यष्टि से मौन कथन
मनन उपरांत का संश्लेषण किया सार
बन जाता हैं अभिव्यक्ति
जिसमे आत्मीय पावनता संग
रहता हैं अनुभूति का यथार्थ
जिसे नहीं कहता मेरा सत्य
नही बन सकती आत्मीयता
आत्म अभिव्यक्ति
मुझे वही प्रकट करने की सामर्थ्य
जो रखता हूँ मैं
ओर इसी कारण बहुत बार
अभिव्यक्ति बन जाती है रूग्ण
जब संसार की कामनाओं का तूफान
घेरता मुझे ओर उखाड़कर फैंकता
अतिशय वासना गर्त
ओर तब की अभिव्यक्ति आत्म अभिव्यक्ति
कैसे कहूँ
भीतर की अशांत लहरे प्रखर तपिश पाकर
बनती अभिव्यक्ति
ओर वह सृजन नही वासनामय विनाश का बिंब
भरती जाती आसपास के वातावरण
अभिव्यक्ति नही कही जा सकती
मेरी आत्मा का साक्षात्कार
केवल स्वयं को ऊर्जावान बनाने का
माध्यम बनी आज की अभिव्यक्ति ।
छगन लाल गर्ग ।
आत्म साक्षात्कार नही
अनुभूति का व्यष्टि से मौन कथन
मनन उपरांत का संश्लेषण किया सार
बन जाता हैं अभिव्यक्ति
जिसमे आत्मीय पावनता संग
रहता हैं अनुभूति का यथार्थ
जिसे नहीं कहता मेरा सत्य
नही बन सकती आत्मीयता
आत्म अभिव्यक्ति
मुझे वही प्रकट करने की सामर्थ्य
जो रखता हूँ मैं
ओर इसी कारण बहुत बार
अभिव्यक्ति बन जाती है रूग्ण
जब संसार की कामनाओं का तूफान
घेरता मुझे ओर उखाड़कर फैंकता
अतिशय वासना गर्त
ओर तब की अभिव्यक्ति आत्म अभिव्यक्ति
कैसे कहूँ
भीतर की अशांत लहरे प्रखर तपिश पाकर
बनती अभिव्यक्ति
ओर वह सृजन नही वासनामय विनाश का बिंब
भरती जाती आसपास के वातावरण
अभिव्यक्ति नही कही जा सकती
मेरी आत्मा का साक्षात्कार
केवल स्वयं को ऊर्जावान बनाने का
माध्यम बनी आज की अभिव्यक्ति ।
छगन लाल गर्ग ।