Friday, June 17, 2016

लघुता युक्त

नही होता भरोसा
अपने लघुता युक्त मूढताओं पर
बिल्कुल मनन नकारात्मक
जीवन की बहुतायत ऊर्जा
करते जाता खर्च
अंध अनुकरण
पर्दे की तिलस्मी दुनिया का
जो केवल बहुरूपिया जीवन दृश्य
ओर मे उसी मे विमोहित
मात्र तुच्छता युक्त हरकतों मे
हर बनावट के साथ रंग जाता
बदल देता स्वच्छ कुदरत
ओर इसी मूर्खता मे
मौलिक रूप होता जाता दूषित
कहां रह पाता प्राकृत मे
बहुत गहरे
जीवन का शुद्ध आचरण अज्ञात मे
होने लगता प्रभावित
ओर छल प्रवंचना का अदभुत कौशल
मुझे नहीं रहने देता मानव
बन जाता फिर चलता फिरता पोस्टर
यांत्रिक मानव
ओर यह प्रजाति प्रगतिशील हो
मनन करना होगा
मुझे अपनी मूढताओं पर।
छगन लाल गर्ग