बात कहूँ
कहने लायक शायद ही हो
परि कहना तो होगा
फिर मेरा अपना सच
प्रजातांत्रिक
भरोसे की बात
खुद का खुद के लिए
बडा अदभुत हूँ मैं भी
नही करता अब
सबके हितार्थ
केवल मेरे हित की परवाह
अपना खुद का भरोसा
करना भी
बहुत बडा स्वार्थ
इसी कारण नही करता
पहले भी
ओर अब भी भरोसा
कभी नही किया
समझदारी बाद अपने हर कार्य का
हर बार करवाता हूँ अनुमोदन
हर कार्य के करने से पहले
ओर संपूर्ण आत्मविश्वास मिलता
अन्यो की सहमति पर
रफ्तार नही पकड पाता
प्रगति के साथ सच पर
सहमति छोड देती थोडा पीछे
पर हाँ बच जाता इसी कारण
असफलता से
परिणाम मिलते जाते सकारात्मक
शायद जीने लगा प्रजातंत्र
कास नेतृत्व भी चल सकता इसी राह
आखिर यही तो करना होता
देर सवेर सबके विकास निमित्त ।
छगन लाल गर्ग ।
कहने लायक शायद ही हो
परि कहना तो होगा
फिर मेरा अपना सच
प्रजातांत्रिक
भरोसे की बात
खुद का खुद के लिए
बडा अदभुत हूँ मैं भी
नही करता अब
सबके हितार्थ
केवल मेरे हित की परवाह
अपना खुद का भरोसा
करना भी
बहुत बडा स्वार्थ
इसी कारण नही करता
पहले भी
ओर अब भी भरोसा
कभी नही किया
समझदारी बाद अपने हर कार्य का
हर बार करवाता हूँ अनुमोदन
हर कार्य के करने से पहले
ओर संपूर्ण आत्मविश्वास मिलता
अन्यो की सहमति पर
रफ्तार नही पकड पाता
प्रगति के साथ सच पर
सहमति छोड देती थोडा पीछे
पर हाँ बच जाता इसी कारण
असफलता से
परिणाम मिलते जाते सकारात्मक
शायद जीने लगा प्रजातंत्र
कास नेतृत्व भी चल सकता इसी राह
आखिर यही तो करना होता
देर सवेर सबके विकास निमित्त ।
छगन लाल गर्ग ।