आह । बहुत सुन्दर
बडी हृदय स्पर्शी रचना तुम्हारी
भाई वाह माकूल कवि तुम
सत्य संश्लेषण गजब हुआ कविता भीतर
पर बहुत लघु हो जाता सत्य
जब तुम पिरोने लगते अपने परिमार्जित शब्दों से
अपना भोगा संसारी जीवन
जो स्वयं क्षणभंगुर नही शास्वत
मात्र आभासित स्वप्निल पर तुम्हारी तरह
विभिन्न भाव रंगमय रमणीय चित्रों से भरा
अपनी समस्त रागिनी से विलुप्त हुए तुम
मेरे कवि बन चुके द्रव्यमान संसार
नही फर्क आता इससे कि तुम हो अरूप या रूपमय
हर रूपमय या अरूपमय नही होता सत्य
फिर सत्य असत्य का निर्धारण
सुन्दर असुन्दर का निर्धारण भी कहां प्रज्ञा मय
असार के से जुडा सारा सौंदर्य भी सत्य भी
अजीब बोध से मत इतरा जाना
कवि मेरे
संसार की अनेकानेक मूढताओं को मिली
संजीवनी तुमसे
बाहरी स्थूलता के असली पारखी मेरे कवि केवल तुम
तुम्हारे गुरू मंत्र आज ला रहे जीवन मे भूचाल
समझते हो ना मेरा संकेत सामाजिक व्यवस्था पर
प्रबल कुठाराघात केवल क्षणिकाएं तुम्हारी
सुनोगे विनती मेरी
तुम्हारी कविताओं में बहुत रसायन
पर भरो ना तनिक रति भर ही सही शास्वत सत्य ।
छगन लाल गर्ग ।
बडी हृदय स्पर्शी रचना तुम्हारी
भाई वाह माकूल कवि तुम
सत्य संश्लेषण गजब हुआ कविता भीतर
पर बहुत लघु हो जाता सत्य
जब तुम पिरोने लगते अपने परिमार्जित शब्दों से
अपना भोगा संसारी जीवन
जो स्वयं क्षणभंगुर नही शास्वत
मात्र आभासित स्वप्निल पर तुम्हारी तरह
विभिन्न भाव रंगमय रमणीय चित्रों से भरा
अपनी समस्त रागिनी से विलुप्त हुए तुम
मेरे कवि बन चुके द्रव्यमान संसार
नही फर्क आता इससे कि तुम हो अरूप या रूपमय
हर रूपमय या अरूपमय नही होता सत्य
फिर सत्य असत्य का निर्धारण
सुन्दर असुन्दर का निर्धारण भी कहां प्रज्ञा मय
असार के से जुडा सारा सौंदर्य भी सत्य भी
अजीब बोध से मत इतरा जाना
कवि मेरे
संसार की अनेकानेक मूढताओं को मिली
संजीवनी तुमसे
बाहरी स्थूलता के असली पारखी मेरे कवि केवल तुम
तुम्हारे गुरू मंत्र आज ला रहे जीवन मे भूचाल
समझते हो ना मेरा संकेत सामाजिक व्यवस्था पर
प्रबल कुठाराघात केवल क्षणिकाएं तुम्हारी
सुनोगे विनती मेरी
तुम्हारी कविताओं में बहुत रसायन
पर भरो ना तनिक रति भर ही सही शास्वत सत्य ।
छगन लाल गर्ग ।