Wednesday, June 15, 2016

खबरदार

खबरदार रहो
हर समय बहुत खतरा
अपने आसपास
दूर नही
तुम्हारे अपनो से
जो दिलाते विश्वास की
सौगंध
ओर कहते रहते
बहुत करता हूँ प्रेम तुमसे
ओर दिलाते रहते
भरोसा
अपनी हर क्रिया मे
कि तुम
करते रहो महसूस
बात ओर व्यवहार मे भरोसा
ओर बहुत गहरे
झांकना कभी
उसी प्रेम ओर भरोसे की तह
आने लगेगा समझ
उनका बहुत गहराई का प्रेम
शिकार हो तुम
उनके जो बनते प्रेमी
प्रेम ओर विश्वास प्रलोभन
बांधा जा रहा तुम्हें
कारण मात्र अपना मतलब
जब तक नही होता सिद्ध
बहुत करते प्रेम तुमसे
ओर फिर
सोचो तो
मतलब निकालने के बाद
क्या होगा तुम्हारा
तुम्हारी क्षमता पर निर्भर
अब यह निर्णय लेना
तुम्हारा काम
कि तुम्हारी क्षमता
कब लेती निर्णय
ओर निर्णय का विरोध करने
पर तुम कितने रहते अडिग
खबरदारी कारण
मात्र तुम सब कुछ तुम ।
छगन लाल गर्ग ।