मैं हूँ क्या
महसूस करो मुझे
विरह राग गाते तो हो
ध्वनि गून्जन सुनती हूँ
वेदना से भीगे स्वर
तुम ही हो
अहसास होता हैं मुझे
लय से परिचय पाती हूँ तुम्हारा
ठीक वहीं स्वर
तुम्हारे ही विकलता को दोहराता
क्या पहुँचा हैं तुम तक
महसूस करो
मैं ही हूँ ना
अनंत ताप का साम्राज्य
जगत को जलता पर
यह हैं मेरे प्राणों का ताप
अनंत से जुदा
मेरी तपन का ताप
क्या हृदय चिरता हैं तुम्हारा
नस नस स्फुटन देता
फटता हैं मेरा अस्तित्व
उदास हवाओं की तपन
झुलसती हैं ना तुम्हें
मेरे से तपन पाती बहती
आती हैं तुम्हारी ओर
पहुँची क्या तुम तक
महसूस करो मुझे
मैं हूँ क्या
यह बिखरा बिखरा उदास हवाओ का
अस्तित्व मेरा हैं
समेटो अपने भीतर
आकार करो मूर्त
तभी तो
अहसास पाओगे
प्रियतम तुम मेरा
मेरे होने का
यह अहसास पायी हवा
आने दो मेरी ओर
बैचेनी मत बढाओ
महसूस करो ना प्रियतम
मैं हूँ क्या ।
छगन लाल गर्ग।
महसूस करो मुझे
विरह राग गाते तो हो
ध्वनि गून्जन सुनती हूँ
वेदना से भीगे स्वर
तुम ही हो
अहसास होता हैं मुझे
लय से परिचय पाती हूँ तुम्हारा
ठीक वहीं स्वर
तुम्हारे ही विकलता को दोहराता
क्या पहुँचा हैं तुम तक
महसूस करो
मैं ही हूँ ना
अनंत ताप का साम्राज्य
जगत को जलता पर
यह हैं मेरे प्राणों का ताप
अनंत से जुदा
मेरी तपन का ताप
क्या हृदय चिरता हैं तुम्हारा
नस नस स्फुटन देता
फटता हैं मेरा अस्तित्व
उदास हवाओं की तपन
झुलसती हैं ना तुम्हें
मेरे से तपन पाती बहती
आती हैं तुम्हारी ओर
पहुँची क्या तुम तक
महसूस करो मुझे
मैं हूँ क्या
यह बिखरा बिखरा उदास हवाओ का
अस्तित्व मेरा हैं
समेटो अपने भीतर
आकार करो मूर्त
तभी तो
अहसास पाओगे
प्रियतम तुम मेरा
मेरे होने का
यह अहसास पायी हवा
आने दो मेरी ओर
बैचेनी मत बढाओ
महसूस करो ना प्रियतम
मैं हूँ क्या ।
छगन लाल गर्ग।