ढूँढता हूँ लकीरो का गणित
असत्य विचारो की कडियो मध्य
जो परिवर्तित हुए हैं तर्को के सत्य से
मापदंड बदलता जाता
जीवन जीने के संशोधित उपायों का
उथला रह जाता हूँ
निछोड निवृत्त हो चुका
भावनाओ की भार झेलती संवेदनाओ से
लगता हैं जीना सीखा हूँ
नयी संस्कृति के साथ
पीछे देखना दकियानूसी होगी
भौदूपन के अंदाज से मुक्त हुआ सा
अहसास करता जीता हूँ असत्य
परिमार्जन का नशा
नित्य सिर चढा अपनाता हूँ
असत्य का कोहरा
तर्को की बैशाखियो सहारे
ओर दिखाता जीता हूँ बेदाग जिन्दगी
बहुत पीछे छोड दिये हैं
भावना जीते सत्य
कैसे पाओगे छुटकारा मुझसे
घने बियाबन के घेरते पंजो से
मुक्ति होगी भी
नहीं जानता इतना कहने दो
हर चमक का जीवन
धुन्धलाता हैं
मौलिकता का सत्य तभी
उघडता हैं
ओर तब शायद बहुत विलम्ब हो होगा
ओर पश्चाताप की जिन्दगी
बदतर मौत का प्रतीक ना बन जाये
यह सब हो
कि पहले सोचना होगा ।
छगन लाल गर्ग।
असत्य विचारो की कडियो मध्य
जो परिवर्तित हुए हैं तर्को के सत्य से
मापदंड बदलता जाता
जीवन जीने के संशोधित उपायों का
उथला रह जाता हूँ
निछोड निवृत्त हो चुका
भावनाओ की भार झेलती संवेदनाओ से
लगता हैं जीना सीखा हूँ
नयी संस्कृति के साथ
पीछे देखना दकियानूसी होगी
भौदूपन के अंदाज से मुक्त हुआ सा
अहसास करता जीता हूँ असत्य
परिमार्जन का नशा
नित्य सिर चढा अपनाता हूँ
असत्य का कोहरा
तर्को की बैशाखियो सहारे
ओर दिखाता जीता हूँ बेदाग जिन्दगी
बहुत पीछे छोड दिये हैं
भावना जीते सत्य
कैसे पाओगे छुटकारा मुझसे
घने बियाबन के घेरते पंजो से
मुक्ति होगी भी
नहीं जानता इतना कहने दो
हर चमक का जीवन
धुन्धलाता हैं
मौलिकता का सत्य तभी
उघडता हैं
ओर तब शायद बहुत विलम्ब हो होगा
ओर पश्चाताप की जिन्दगी
बदतर मौत का प्रतीक ना बन जाये
यह सब हो
कि पहले सोचना होगा ।
छगन लाल गर्ग।