बाकी रहा
अंतिम पृष्ठ जिन्दगी का
अधूरी सी लगती पुस्तक
अब तक जो लिखी
जगह जगह विसंगति खाते शब्द
नहीं उकेर सके यथार्थ जीया
असलीपन से भागे भागे
मुँह छिपाते शब्दों बीच
रहस्यमय अप्रचलित शब्दों की ओट
विलुप्त होते रहे
वास्तविक जिया जीवन
नहीं दे पाया अपनी साख
कि बन सके
एक परंपरा जिसे उद्धरण के लिए
रखा जाय सुरक्षित
ओर अंतिम पृष्ठ
लिखना विचारों के गुम्फन तले
असली सत्य कहते
डरता हूँ
खोजता हूँ कोई रूपक
शब्दों का
कि समेट ले सके सच्चाई की गंध
अनुभूति की सच्चाई को दे सके
खरोच कि हल्के से दर्द की
अनुभूति पाये
बीच का पृष्ठ
पारिवारिक विघटन की तरह
एकल अंश बना
नहीं रह जाय जीवन
फिर नहीं लिखा जायेगा
कभी भी
यह अंतिम पडाव का
बाकी रहा पृष्ठ ।
छगन लाल गर्ग।
अंतिम पृष्ठ जिन्दगी का
अधूरी सी लगती पुस्तक
अब तक जो लिखी
जगह जगह विसंगति खाते शब्द
नहीं उकेर सके यथार्थ जीया
असलीपन से भागे भागे
मुँह छिपाते शब्दों बीच
रहस्यमय अप्रचलित शब्दों की ओट
विलुप्त होते रहे
वास्तविक जिया जीवन
नहीं दे पाया अपनी साख
कि बन सके
एक परंपरा जिसे उद्धरण के लिए
रखा जाय सुरक्षित
ओर अंतिम पृष्ठ
लिखना विचारों के गुम्फन तले
असली सत्य कहते
डरता हूँ
खोजता हूँ कोई रूपक
शब्दों का
कि समेट ले सके सच्चाई की गंध
अनुभूति की सच्चाई को दे सके
खरोच कि हल्के से दर्द की
अनुभूति पाये
बीच का पृष्ठ
पारिवारिक विघटन की तरह
एकल अंश बना
नहीं रह जाय जीवन
फिर नहीं लिखा जायेगा
कभी भी
यह अंतिम पडाव का
बाकी रहा पृष्ठ ।
छगन लाल गर्ग।