Wednesday, June 8, 2016

स्मृति पथ

आते तो हो तुम 
चुपके चुपके स्मृति पथ चल
नित स्नेह राग की
निर्मल छाया बन बीछ जाते
जीवन पथ फिर 
सुख सार बन जाता
आते तो हो तुम
फिर जाते हो
दे जाते हो
सूना पड़ा मेरा हृदय सन्नाटा
आते ही तुम्हारे
स्पंदन देते वीणा तंरग बन
कदम पहचाने
हृदय चरण के बजते नुपूर
प्रति कदम तुम्हारे
भर भर जाती
रग रग मेरे
झंकार तुम्हारी नेह भीगोई
भर जाते हो
अब बजता जाता
संगीत घूल स्वर
उभर उभर कंठध्वनि भरता
राग वहीं प्रिय तुम्हारा
संयोग क्षणो की रागिनी गाता
अमंद राग घना
पीया हुआ हूँ
स्मृति घेरती अधर रस मदिरा
होले होले
गाने लगा हूँ
यह कैसा विस्तृत उन्माद फिर
नस नस मेरे
प्रिय फिर भर जाते हो
आते तो हो तुम ।
छगन लाल गर्ग।